घंटाघर में स्थित रैन बसेरा में न आश्रितों के लिए बेड न ही महिलाओं के लिए ऐंट्री

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देहरादून। ठंड बढ़ने के साथ ही रैन बसेरे में आश्रितों की संख्या भी बढ़ने लगती है। इसके बाद भी रैन बसेरों के हालत का कोई गौर नहीं करता है। घंटाघर में स्थित रैन बसेरा में 100 लोगों के रहने की व्यवस्था है। यहां पर सोने के लिए दो हॉल हैं। हर एक हॉल में 50 लोगों के लिए गद्दे और कंबल हैं। लेकिन लोग के लिए बेड न होने की वजह से उन्हें जमीन पर गद्दा बिछाकर सोना पड़ रहा है। साथ ही हॉल में रूम हीटर की भी कोई व्यवस्था नहीं है। इस वजह से उन्हें इतनी ठंड में कंबल के सहारे ही रहना पड़ रहा है। वहीं यहां पर महिलाओं के रहने की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां पर केवल पुरूष ही आ सकते हैं। रैन बसेरे के प्रबंधक प्रदीप बंसल का कहना है कि रैन बसेरे का संचालन दून शैल्टर्स सोसायटी फॉर द होमलैस कर रही हैं। यहां पर हमेशा 80 से 100 के बीच लोग रहते हैं। उनके लिए यहां पर रजाई- गद्दे की उचित व्यवस्था है। साथ ही उन्हें अन्य सुविधाएं भी नहीं दी जाती है। लेकिन यहां पर बेड नहीं है इसका कारण है कि बेड लग जाने से यहां पर लोगों के रहने की संख्या कम हो जाएगी। इसके साथ ही लोग कई बार बेड को तोड़ देते है और फिर खुद को चोटिल कर देते हैं।

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