शहर में महिलाओं के लिए पिंक टायलेट की व्यवस्था नहीं

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : करीब दो लाख से अधिक की आबादी वाले कोटद्वार क्षेत्र में महिलाओं की तादाद करीब चालीस से पचास फीसद है। लेकिन, बात सार्वजनिक शौचालय की करें तो क्षेत्र में कहीं भी महिलाओं के लिए पिंक टायलेट की व्यवस्था नहीं है। जिस स्टेशन में प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद में मैदानी व पर्वतीय क्षेत्रों से महिलाएं पहुंचती हैं, वहीं भी महिलाओं के लिए प्रसाधन की कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। कई जगह तो हाथ धोने के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नगर निगम की स्वच्छता की बयार केवल फाइलों में ही बह रही है।
विधानसभा चुनाव हो अथवा नगर निगम के चुनाव। हर चुनाव में महिलाओं के अधिकारों की बात की जाती है। लेकिन, यह बातें केवल चुनावी माहौल तक सीमित रहती है। जबकि, धरातल पर इसका दूर-दूर तक कोई नाता ही नहीं है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण शहर में महिलाओं के लिए एक पिंक शौचालय की व्यवस्था तक नहीं होना है। बाजार आने वाली महिलाओं को मजबूरन सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग करना पड़ता है। स्थानीय महिला शांति देवी, पुष्पा देवी, हेमा सिंह ने बताया कि नगर निगम गठन को आठ वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। लेकिन, अब तक शहर में महिलाओं के लिए एक पिंक शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी पहाड़ से मैदान को आने वाली महिलाओं को होती है। सार्वजनिक शौचालय के उपयोग में महिलाएं सहज महसूस नहीं करती। महिलाओं को प्रत्येक नागरिक सुविधा में पचास फीसदी का अधिकारी मिलना चाहिए। वहीं, अधिकांश सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति भी बदहाल है। कई जगह हाथ धोने के लिए पानी नहीं है तो कहीं गंदगी के ढेर लगे रहते हैं।

बड़ी संख्या में बाजार आती हैं महिलाएं
कोटद्वार शहर में प्रतिदिन सैकड़ों की तादात में महिलाएं व युवती बाजार खरीददारी करने के लिए पहुंचती हैं। शौचालय के अभाव में महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पूर्व में कुछ सामाजिक संस्थाओं ने महापौर शैलेंद्र सिंह रावत को इस समस्या से अवगत करवाया था। जिसके बाद उन्होंने लोगों को पिंक शौचालय निर्माण के लिए जगह चिन्हित करने का आश्वासन दिया।

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