पाप से बचने के लिए समय रहते गलती का प्रायश्चित जरूरी: हरिदास महाराज

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ऋषिकेश(। कथा मर्मज्ञ हरिदास महाराज ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। मंगलवार को त्रिवेणी घाट पर श्री वीरवर दायक काले हनुमान मंदिर गौतम कुंज की संस्थापक ब्रह्मलीन महंत जनक किशोरी दासी की प्रथम बरसी पर श्रीमद्भागवत कथा दूसरे दिन भी हुई। कथा व्यास हरिदास महाराज ने पांडवों के जीवन में श्रीकृष्ण की कृपा को सुंदर ढंग से बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव के पास जाते हैं। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षयपात्र प्राप्त किया। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। इसके बदले प्रकृति ने मानव का रक्षण किया। भागवत श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है वह हर किसी में बसता है। इस मौके पर महामंडलेश्वर वृंदावन दास महाराज, महंत रामकृपाल दास, पूर्व मेयर अनिता ममगाईं, रघनुंदन गौतम, स्वीकृति गौतम, प्रीति गौतम, लक्ष्मी गौतम, राजेश गौतम, नीलम, रेनू शर्मा, सपना, डॉ. पिंकी गौतम, हरिओम गौतम, डॉ. अमित गौतम, ऋषभ गौतम, रामानंद सिंह, मनीष बंडवाल, अरुण मनवाल, राजु गुप्ता और सुमति सिल्सवाल आदि मौजूद रहे।

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