नशामुक्त हो उत्तराखंड और बड़ी परियोजनाओं पर लगे रोक

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देहरादून(। उत्तराखंड महिला मंच की ओर से शहीद स्मारक परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बढ़ता नशा, महिला हिंसा, बड़ी परियोजनाएं, कारपोरेट की लूट, पर्यावरण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों चिंतन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि 25 साल के बाद भी उम्मीदों का उत्तराखंड नहीं बन सका है। शनिवार को उत्तराखंड महिला मंच ने शनिवार को अपना 32वां स्थापना दिवस मनाया। शहीद स्मारक परिसर में आयोजित कार्यक्रम में राज्य की दशा और दिशा को लेकर तीन चिंतन सत्र आयोजित हुए। मंच की कमला पंत ने कहा कि जिन उम्मीदों के साथ अलग राज्य की लड़ाई लड़ी गई थी, सरकारें उन उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी हुई हैं। निर्मला बिष्ट ने बेरोजगारी, विकास के नाम पर तबाही, पर्यटन के नाम पर राज्य को बदहाल करने, बढ़ते नशे, पेपर लीक सहित विभिन्न मसलों पर अपनी बात रखी। ऊषा भट्ट ने कहा कि महिला मंच भी चाहता है कि वह अपने स्थापना दिवस पर रंगारंग कार्यक्रम करे। लेकिन, राज्य अभी इस हाल में नहीं पहुंचा है कि खुशियां मनाई जा सकें। इसलिए हमें राज्य के मुद्दों पर परिचर्चा करनी पड़ती है। बढ़ता नशा और महिला हिंसा पर आयोजित परिचर्चा में मल्लिका विर्दी, गीता गैरोला, दीपा कौशलम और माया चिलवाल ने हिस्सा लिया। सत्र का संचालन त्रिलोचन भट्ट ने किया। कारपोरेट की लूट और पर्यावरण विषय पर आयोजित सत्र में प्रो. राघवेन्द्र, हरिओम पाली और जया सिंह ने हिस्सा लिया। इस सत्र का संचालन विमला कोली ने किया। यह सत्र मुख्य रूप से प्रस्तावित रिस्पना-बिंदाल एलीवेटेड रोड के दुष्परिणामों पर केंद्रित रहा। शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की अवधारणा सत्र में पूर्व शिक्षा निदेशक नंदनंदन पांडेय और जन विज्ञान समिति के विजय भट्ट ने हिस्सा लिया और संचालन तुषार रावत ने किया। कार्यक्रम का संचालन चंद्रकला ने किया। सतीश धौलाखंडी और शहर के अलग-अलग हिस्सों से आई महिलाओं ने जनगीत प्रस्तुत किये। इस मौके पर वयोवृद्ध राज्य आंदोलनकारी भुवनेश्वरी कठैत, शांता नेगी, सर्वेश, उर्मिला शर्मा, हेमलता नेगी, विजय नैथानी, सीमा नैथानी, मंजू बलौदी, भगवानी रावत, शांति सेमवाल, मातेश्वरी रजवार, सरला पुरोहित, परमजीत कक्कड़, जय नारायण नौटियाल, आशीष गर्ग, नीलेश राठी, जगमोहन मेहंदीरत्ता, मोहित डिमरी, लुशुन टोडरिया, राकेश अग्रवाल, रोशन धस्माना, पंचम सिंह बिष्ट, गजेन्द्र भंडारी, रामचंद्र रतूड़ी, अलख दुबे मौजूद रहे।

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