बाड़मेर , पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ाते हुए वेदांता लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 में जल प्रबंधन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। कंपनी ने अपने औद्योगिक संचालन के दौरान 85 मिलियन घन मीटर से अधिक पानी का पुनर्चक्रण (क्रद्गष्4ष्द्यद्ग) और पुन: उपयोग किया है, जो लगभग 34,000 ओलंपिक आकारों के स्विमिंग पूलों की क्षमता के बराबर है। नेट वॉटर पॉजिटिव बनने की ओर कदम वेदांता समूह की प्रमुख इकाइयाँ—हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, केयर्न ऑयल एंड गैस और आयरन ओर व्यवसाय—अब आधिकारिक रूप से नेट वॉटर पॉजिटिव की श्रेणी में आ गई हैं। इसका सीधा अर्थ है कि ये इकाइयाँ जितना पानी अपने कार्यों के लिए उपयोग करती हैं, उससे कहीं अधिक मात्रा में जल स्रोतों का पुनर्भरण कर रही हैं।
बाड़मेर में ग्रामीण जल संचयन को मिला बढ़ावा
विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान के जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में वेदांता की इकाई केयर्न ऑयल एंड गैस ने प्रभावी कार्य किए हैं:
तालाब और खडीन: बाड़मेर जिले में 5 सामुदायिक नाड़ियों (तालाबों) और 100 से अधिक खडीन (पारंपरिक मिट्टी के बांध) का विकास किया गया है।
वर्षा जल संचयन: लगभग 70 सामुदायिक वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण कर मानसून के पानी को सहेजने का प्रबंध किया गया है।
स्थानीय लाभ: इन पहलों से न केवल भूजल स्तर में सुधार हुआ है, बल्कि स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को कृषि व घरेलू उपयोग के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।
लक्ष्य 2030 : वेदांता ने वर्ष 2030 तक पूरी तरह से नेट वॉटर पॉजिटिव बनने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कंपनी उन्नत तकनीक, प्रक्रियात्मक नवाचार और सामुदायिक भागीदारी के जरिए जल दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी का मानना है कि औद्योगिक प्रगति और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को साथ लेकर ही उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।