30 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी मामले में विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को मिली जमानत

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मुंबई , 30 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मामले में विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेताम्बरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट ने नियमित जमानत दे दी है और साथ ही दोनों पक्षों को मध्यस्थता के जरिए मामले को सुलझाने की सलाह दी है। इससे पहले 13 फरवरी को मामले को लेकर हुई सुनवाई में पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने दंपत्ति को मानवीय आधार पर अंतरिम जमानत दी थी और कहा था कि जेल में बंद करके पैसे की रिकवरी नहीं की जा सकती है और साथ ही राजस्थान पुलिस को मामले में नोटिस भी जारी किया था। गुरुवार को कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए दंपत्ति को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया, लेकिन जमानत के दिशा-निर्देश उदयपुर कोर्ट ही तय करेगा। बता दें कि 7 दिसंबर से जेल में बंद विक्रम भट्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट में जमानत याचिका डाली थी, लेकिन वहां से राहत न मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
30 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में आरोप है कि भट्ट दंपति ने शिकायतकर्ता को उसकी दिवंगत पत्नी के जीवन पर बनने वाली बायोपिक और तीन अन्य फिल्मों के लिए 30 करोड़ से अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया था और उन्हें इसके एवज में अच्छे मुनाफे का भरोसा दिया था, जो पूरा नहीं हुआ। कुछ फिल्मों की शूटिंग हुई, लेकिन बाकी फिल्में ठंडे बस्ते में रहीं। पैसे वापस मांगने पर इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के संस्थापक डॉक्टर अजय मुर्डिया के साथ भट्ट दंपत्ति टालमटोल करने लगे। आखिर में उन्हें कोर्ट का सहारा लेना पड़ा।
बता दें कि इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के संस्थापक डॉक्टर अजय मुर्डिया उदयपुर और देश के बाकी राज्यों में आईवीएफ सेंटर चलाते हैं। उन्होंने सबसे पहले उदयपुर से ही बिजनेस की शुरुआत की थी। संस्थापक चाहते थे कि उनकी दिवंगत पत्नी की बायोपिक बने और उसी के लिए वे विक्रम भट्ट के संपर्क में आए थे।
30 करोड़ के अलावा विक्रम भट्ट और उनकी बेटी 13.5 करोड़ के एक अन्य धोखाधड़ी के केस में लिप्त हैं, जहां एक बिजनेसमैन ने उन पर निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है।

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