जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी : कल्जीखाल ब्लॉक में गुलदार और भालू का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार गुलदार और भालू की आवाजाही से ग्रामीण दहशत में है। शुक्रवार को कल्जीखाल ब्लाक के डांगी गांव के तीन बच्चें हर दिन की तरह स्कूल जा रहे थे। बच्चें घर से कुछ दूर पैदल रास्ते में जा ही रहे थे, कि अचानक उनको एक भालू दिखाई दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द ही गुलदार व भालू के आतंक से निजात नहीं दिलाई गई तो वह डीएम व डीएफओ गढ़वाल के कार्यालय का घेराव करेंगे।
शुक्रवार को डांगी गांव में स्कूल जा रहे बच्चों के रास्ते में अचानक भालू आ धमका, जिसके डर से बच्चे गांव की ओर वापस भागे। जबकि बच्चों के साथ स्कूल का चतुर्थ श्रेणी कर्मी भी था। इसके बाद ग्रामीणों ने बच्चों को स्कूल छोड़ा। जिससे डरे सहमे बच्चें वापस घर की ओर आने लगे। बच्चों के साथ जा रहे स्कूल के चतुर्थ श्रेणी कर्मी ने ग्रामीणों को फोन पर भालू के होने की सूचना दी। जिसके बाद ग्रामीणों ने बच्चों को स्कूल छोड़ा। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन डांगी ने बताया कि राजकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय डांगी में कुछ छ: बच्चें अध्ययनरत हैं। इनमें तीन बच्चें डांगी व तीन थनुल गांव के हैं। बताया कि स्कूल जंगल के बीच है। क्षेत्र के लंबे समय से गुलदार व भालू का आतंक बना हुआ है। शाम ढलते ही ग्रामीण अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं। लेकिन अब भालू स्कूली बच्चों की राह भी रोक रहा है। बताया कि गांव के तीन बच्चें स्कूल जा रहे थे। जिन्हें रास्ते में भालू अपने दो बच्चों के साथ अचानक आ गया। बताया कि ग्रामीण जंगली जानवरों के आतंक से परेशान हैं। लेकिन वन विभाग ग्रामीणों की सुध नहीं ले रहा है। वहीं, गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ अभिमन्यु सिंह ने बताया कि भालू की सक्रियता की जानकारी ली जा रही है। जल्द ही टीम को मौके पर तैनात किया जाएगा।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित
ज्ञात हो कि पहले भी कई बार स्कूली बच्चों को गुलदार और भालू मिल चुका है। जिसके चलते बच्चों के अभिभावकों ने उच्च अधिकारियों से कुछ समय के लिए विद्यालय को गांव स्थित खाली पढ़ी प्राइमरी स्कूल में संचालन करने की मांग की थी, ताकि अभिभावक अपने बच्चों को जंगली जानवरों से सुरक्षित महसूस कर सके। हालांकि राजकीय उच्चतर माध्यम विद्यालय डांगी में मात्र 6 बच्चे ही पढ़ते है। जिसमें 3 बच्चे थनूल गांव के और 3 बच्चे डांगी गांव के है। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन डांगी ने बताया कि प्राइमरी विद्यालय पूरी तरह संचालित करने की स्थिति में है। मतदान के लिए निरंतर भवन का उपयोग किया जाता है। जिसमें राजस्व विभाग ने अपनी रिपोर्ट निर्वाचन अधिकारी को भेजी थी। उसके बाद ही पोलिंग पार्टियां उक्त विद्यालय में रहते है। इसके अलावा उनके पास विकल्प के तौर पंचायत भवन भी है। उन्होंने कहा कि मात्र 6 छात्राओं पढ़ाने के लिए प्राइमरी विद्यालय और पंचायत भवन पर्याप्त है। उन्होंने बताया कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित है। प्रभारी प्रधानाचार्य नीलम रावत ने बताया कि प्राइमरी विद्यालय संचालित करने लायक नहीं है। जंगली जानवरों से सुरक्षा को लेकर शनिवार को उन्होंने अभिभावकों की एक आपात बैठक बुलाई है। वहीं खंड शिक्षा अधिकारी कल्जीखाल संजय कुमार ने बताया कि वह स्वयं प्राइमरी विद्यालय का औचक निरीक्षण करेंगे की भवन विद्यालय संचालित करने लायक है या नहीं उसके बाद ही निर्णय लिया जाएगा।