हम महर्षि दयानंद के सपनों का विश्व बनाने को प्रतिबद्: रामदेव

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हरिद्वार। पतंजलि विवि के सभागार में महर्षि दयानंद सरस्वती का द्विशताब्दी जन्मोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर पतंजलि की सेवा, साधना व अनुसंधान का सिंहावलोकन वक्ताओं द्वारा किया गया। कार्यक्रम में स्वामी रामदेव ने कहा कि हम महर्षि दयानंद के सपनों का विश्व बनाने के लिए प्रतिबद्घ व संकल्पित हैं। सर्वप्रथम महर्षि दयानंद ने कहा कि जाति केवल एक मनुष्य की है, बाकि जात-पात, ऊंच-नीच, छल-छद्म पाखण्डी लोगों का काम है। महर्षि दयानंद ने कहा है कि अपना सामर्थ्य इतना बढ़ाओ कि सारे भेदभाव तुम अपने कर्म, चरित्र व आचरण से दूर कर सको।
स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि योगपीठ जात-पात, वर्ग-समुदाय, भेदभाव, ऊंच-नीच के अंतर को समाप्त कर एक मनुष्यता के सूत्र में, एक वेद के सूत्र में, एकाषियों के मार्ग पर, एक सनातन पथ पर चलने की प्रेरणा देने वाला और सनातन धर्म का मूर्त्तरूप संस्थान है। यहां ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, आदिवासी, दलित, वनवासी आदि सब एक साथ समान शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
आचार्य बालष्ण ने कहा कि यह हम सबका सौभाग्य है जहां महर्षि विरजानंद, महर्षि दयानंद, स्वामी श्रद्घानंद जैसे महापुरुषों का संदेश विचार पाथेय के रूप में प्राप्त होता रहता है। उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पतंजलि में आपके लिए कई विधाएं व सम्भावनाएं हैं। हम सभी मिल-जुलकर अग्रणी बनें तथा शिक्षा व चिकित्सा की गुलामी से भारतवर्ष को मुक्ति दिलाएं। प्रति-कुलपति प्रो़ महावीर ने महर्षि दयानंद के दिव्य उपदेशों को उपस्थित प्रतिभागियों से साझा किया। भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एनपी सिंह ने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड के माध्यम से मैकाले की दोषपूर्ण शिक्षा पद्घति के स्थान पर पतंजलि द्वारा प्रतिपादित वेद आधारित शिक्षा को स्थापित कर पतंजलि ने महर्षि दयानंद के सपने को पूरा किया है।

इस दौरान भारत स्वाभिमान के मुख्य केन्द्रीय प्रभारी राकेश, पतंजलि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक ड़ अनुराग वार्ष्णेय तथा पतंजलि हर्बल रिसर्च डिवीजन की प्रमुख ड़ वेदप्रिया आर्य ने पतंजलि की अनुसंधानपरक गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में भारत स्वाभिमान के मुख्य केन्द्रीय प्रभारी स्वामी परमार्थ देव, प्रो केएनएस यादव, कुलसचिव ड़ प्रवीण पूनिया, ड़ मनोहर लाल आर्य, प्रो़ विनोद कटियार, कुलानुशासक स्वामी आर्षदेव सहित पतंजलि अनुसंधान संस्थान, पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय, पतंजलि विवि के वैज्ञानिक, चिकित्सक, आचार्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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