दिल्ली में एक भी शेल्टर नहीं, 3 लाख कुत्तों को कहां डालेंगे

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-मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल
नई दिल्ली,। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को आठ हफ्तों के भीतर शेल्टर होम्स में स्थानांतरित करने के आदेश के बाद, बीजेपी नेता और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी ने इस फैसले को क्रोध में दिया गया असामान्य निर्णय और अव्यवहारिक करार दिया है.
मेनका गांधी ने कहा, यह आदेश व्यावहारिक नहीं है… यह बहुत ही अजीब फैसला है, जो शायद किसी गुस्से में दिया गया है. गुस्से में दिए गए फैसले कभी भी समझदारी भरे नहीं होते…
उन्होंने आगाह किया कि इस आदेश को लागू करना लॉजिस्टिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर एक बड़ी चुनौती होगा. उनके अनुसार न तो कोई सरकारी शेल्टर मौजूद है, और न ही इतनी जल्दी हज़ारों नए केंद्र बनाए जा सकते हैं.
मेनका गांधी ने कहा कि, दिल्ली में एक भी सरकारी शेल्टर नहीं है. तीन लाख कुत्तों को कहां रखोगे? एक भी जगह नहीं है. अगर बनाने जाओ तो कम से कम 15 हज़ार करोड़ रुपये लगेंगे… 3000 नई जगहें ढूंढनी होंगी, वो भी ऐसी जहां कोई न रहता हो… और 1.5 लाख सफाई कर्मचारी रखने होंगे, जिसकी लागत करोड़ों में होगी…
मेनका गांधी ने यह भी चेतावनी दी कि जब आवारा कुत्तों को पकड़ने की कोशिश होगी, तो स्थानीय लोग और कुत्तों को खाना खिलाने वाले फीडर इसका विरोध करेंगे, जिससे हर गली में टकराव हो सकता है.
उन्होंने आगे कहा कि, जब आप कुत्ते पकड़ने जाओगे तो हर गली में झगड़े होंगे. फीडर इन्हें जाने नहीं देंगे, फिर राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे को भुनाने लगेंगी… और जब दिल्ली के कुत्ते हटा दिए जाएंगे, तो दूसरे राज्यों से कुत्ते यहां आने लगेंगे, क्योंकि यहां खाना ज्यादा मिलेगा… फिर क्या करेंगे? दोबारा नसबंदी अभियान चलाओगे और सैकड़ों करोड़ खर्च करोगे?
इससे पहले , जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि सभी इलाकों को आवारा कुत्तों से मुक्त किया जाए और इसमें कोई समझौता नहीं होना चाहिए.
अगर कोई व्यक्ति या संगठन इस प्रक्रिया में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी, न्यायालय ने स्पष्ट किया.
साथ ही कोर्ट ने राज्यों और नगर निकायों को आदेश दिया कि वे पर्याप्त स्टाफ के साथ डॉग शेल्टर्स का निर्माण करें, और कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण सुनिश्चित करें.

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