जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : धुमाकोट की ग्राम सभा बखरोटी में बाघ की दहशत थमने का नाम नहीं ले रही। आए दिन बाघ ग्रामीणों को गांव के आसपास घूमता हुआ नजर आ रहा है। बाघ की दहशत से शिक्षक बच्चों को गांव में ही पढ़ाने के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं, ग्राम चिंपाणी में एक महिला बाघ के हमले में बाल-बाल बची। बाघ को सामने देख महिला मौके पर ही बेहोश हो गई।
मालूम हो कि कार्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत कालागढ़ टाइगर रिजर्व फारेस्ट वन प्रभाग की मंदाल रेंज में पड़ने वाले ग्राम जमूण निवासी गुड्डी देवी (55) पत्नी राज भदोला को आठ मार्च को बाघ ने मार दिया। घटना का पता तब चला, जब शनिवार सुबह रामनगर गए राजू शाम को घर वापस लौटे। राजू को घर से करीब दो सौ मीटर दूर गुड्डी देवी का शव मिला। घटना के बाद विभाग ने गांव में छह कैमरा ट्रैप लगाने के साथ ही विभागीय गश्त भी शुरू कर दी। गौला ग्राम पंचायत के गौला वल्ला, गौला पल्ला, गौला तल्ला व गौला मल्ला, ग्राम पंचायत बखरोटी के बसेड़ी, जमूण, घिरोली, छिमपाणी और ग्राम पंचायत कमेड़ा के भूण्ड, गंगोली, कमेड़ा तल्ला, कमेड़ा पल्ला और कमेड़ा वल्ला गांवों में बाघ की दहशत जारी है। बाघ की दहशत के कारण ग्रामसभा बखरोटी के प्रधान सुरेंद्र सिंह रावत की ओर से पिछले दिनों खंड शिक्षा अधिकारी को पत्र भेज राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कमेड़ा जाने वाले पांच बच्चों के अध्यापन के लिए गांव में ही व्यवस्था करवाने की मांग की। कहा गया कि गांव के पांच बच्चे चार किलोमीटर की दूरी तय कर कमेड़ा जाते हैं। जंगल के रास्ते गांव तक जाना संभव नहीं है। बताना यह भी जरूरी है कि ग्राम कमेड़ा में अध्ययनरत सभी पांच बच्चे बखरोटी गांव के ही हैं। ऐसे में ग्राम प्रधान की ओर से बच्चों को गांव में ही पढ़ाने का अनुरोध किया गया। ग्राम प्रधान के अनुरोध को उचित माना। इसी क्रम में सोमवार को कमेड़ा में सेवारत दोनों शिक्षक बखरोटी पहुंचे और राप्रावि बखरोटी परिसर में पांचों बच्चों को पढ़ाया। वहीं, सोमवार शाम ग्रामसभा बखरोटी के ग्राम चिंपाणी में बाघ के हमले में एक महिला बाल-बाल बची। ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि ग्राम चिंपाणी निवासी मंगला देवी गांव से कुछ दूर घास काट रही थी। इसी दौरान बाघ उनकी तरफ आया। आसपास मौजूद लोगों के शोर मचाने पर जैसे ही मंगला देवी ने मुड़ कर देखा तो सामने बाघ खड़ा था। शोर सुन बाघ जंगल की ओर से चला गया। इधर, बाघ को सामने देख मंगला देवी बेहोश हो गई। गांव वाले किसी तरह उन्हें घर वापस लेकर आए।