पूर्वी सिंहभूम , झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में उस वक्त भारी दहशत फैल गई, जब सुवर्णरेखा नदी के किनारे बालू और मिट्टी के नीचे दबा एक विशालकाय अमेरिकी बम बरामद हुआ। गैस सिलेंडर के आकार का यह ‘अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंसÓ (जिंदा बम) इतना खतरनाक है कि इसे देखकर मौके पर पहुंचे बम निरोधक दस्ते ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए। बम पर स्पष्ट रूप से मॉडल और ‘मेड इन अमेरिकाÓ लिखा हुआ है। करीब 500 पाउंड (लगभग 227 किलोग्राम) वजनी इस विनाशकारी बम को लेकर जानकारों का मानना है कि यह द्वितीय विश्व युद्ध (स्द्गष्शठ्ठस्र ङ्खशह्म्द्यस्र ङ्खड्डह्म्) के दौर का हो सकता है। बम निरोधक दस्ते ने स्पष्ट कर दिया है कि इसे केवल सेना के विशेषज्ञ ही डिफ्यूज कर सकते हैं।
रेत के अंदर छिपा था मौत का सामान, इलाके को किया गया सील
यह खौफनाक बम तब सामने आया जब सुवर्णरेखा नदी के किनारे रेत के अवैध खनन के दौरान एक मजदूर का फावड़ा किसी भारी लोहे की चीज से टकराया। जब इसे बाहर निकालने के लिए आसपास की मिट्टी हटाई गई, तो विशाल सिलेंडरनुमा बम देखकर मजदूरों के पसीने छूट गए। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस बार भारी बारिश के कारण तेज बहाव में यह बम बहकर यहां तक आ गया होगा। इस सनसनीखेज बरामदगी के बाद बहरागोड़ा थाना प्रभारी शंकर प्रसाद कुशवाहा की अगुवाई में पुलिस और प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और ग्रामीणों को बम के आसपास फटकने या किसी भी तरह की छेड़छाड़ न करने की सख्त चेतावनी दी गई है।
क्या है इस 500 पाउंड के ‘स्लीपिंग मॉन्स्टरÓ का खौफनाक इतिहास?
स्थानीय सूत्रों और इतिहास के पन्नों को खंगालने पर इस बम को लेकर एक चौंकाने वाली कहानी सामने आ रही है। अंदेशा जताया जा रहा है कि यह बम दशकों पुराना है। अतीत में महुलडांगरी इलाके के पास एक फाइटर प्लेन क्रैश होने की बड़ी घटना हुई थी। माना जा रहा है कि यह विशालकाय बम उसी दुर्घटनाग्रस्त लड़ाकू विमान का हिस्सा रहा होगा। नदी की नरम मिट्टी और रेत में गहरे धंस जाने के कारण उस वक्त इसमें विस्फोट नहीं हो पाया और यह दशकों तक वहीं ‘स्लीपिंग मॉन्स्टरÓ की तरह दबा रहा।
डिफ्यूज करने के लिए सेना और एयरबेस की ली जा रही मदद
इतने भारी-भरकम और पुराने विस्फोटक को संभालना किसी के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर 500 पाउंड का यह बम गलती से भी फट गया, तो कई सौ मीटर के दायरे में सब कुछ खाक हो जाएगा और भारी तबाही मचेगी। इस खतरे को देखते हुए प्रशासन दो स्तरों पर तैयारी कर रहा है। बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने के लिए रांची से विशेष टीम को बुलाया गया है। इसके अलावा, तकनीकी जांच और विशेषज्ञ सलाह के लिए पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयरबेस के अधिकारियों को भी औपचारिक पत्र भेजकर मदद मांगी गई है।