राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की की शस्त्रों की पूजा

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : विजय दशमी पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से शस्त्रों की पूजा की गई। इस दौरान स्वयं सेवकों ने भगवान श्री राम के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
मंगलवार को जानकीनगर स्थित विद्या मंदिर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला संचालक विष्णु व जिला बौद्धिक प्रमुख सतीश ने स्वयं सेवकों को विजय दशमी के महत्व के बारे में बताया। कहा कि समाज को बेहतर दिशा में ले जाने के लिए हमें भगवान राम के बताए मार्ग पर चलना चाहिए। राजमहल का सुख त्याग कर भगवान राम वन को चले गए थे। नगर प्रचारक प्रमुख राजेश जोशी ने कहा कि हिंदुओं को एकजुट करने के लिए वर्ष 1925 में विजय दशमी के दिन आरएसएस की स्थापना की गई थी। आज संघ से देश विदेश में सैकड़ों लोग जुड़े हुए हैं। संघ लगातार समाज सेवा में अपना प्रमुख योगदान दे रहा है। कहा कि श्रीराम का जीवन आदर्श और कर्तव्यों पर आधारित है, इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। रामचरित मानस के द्वारा तुलसीदास ने प्रभु श्रीराम के जीवन से उनके आदर्शों को सीखने का संदेश दिया है। लंका चढ़ाई के समय श्रीराम ने विनय पूर्वक समुद्र से मार्ग देने की गुहार लगाई। समुद्र से आग्रह करते हुए श्रीराम को तीन दिन बीत गए। लेकिन समुद्र का उस पर कोई प्रभाव नहीं हुआ, तब भगवान राम समझ गए कि अब अपनी शक्ति से उसमें भय उत्पन्न करना अनिवार्य है। रामायण की कथा से हमें यह सीख मिलती है कि यदि आग्रह से जब काम न बने तो फिर भय से काम निकाला जाता है।

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