30 जून तक सभी बसें सरेण्डर करेगी जीएमओ

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। गढ़वाल मोटर्स ऑनर्स यूनियन लिमिटेड (जीएमओयूलि) आगामी 30 जून तक सभी बसों को परिवहन कार्यालय
में सरेण्डर कर देगें। अभी तक जीएमओयू 100 बसों को सरेण्डर कर चुकी है। पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकांश रूटों पर
जीएमओयू की बसों का संचालन किया जाता है। जीएमओयू की बसें सरेण्डर होने से पहाड़ी क्षेत्र के यात्रियों को परेशानी
हो सकती है। कंपनी के अध्यक्ष का कहना है कि घाटे के कारण बसों को सरेण्डर करने का निर्णय लिया है। तीस जून
तक कंपनी अपने सभी 450 वाहनों को सरेंडर कर देगी।
जीएमओयू के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल ने बताया कि कोरोना की महामारी को रोकने के लिए लगाए गए
लॉकडाउन के कारण कारोबार ठप है। सभी बसें खड़ी है। कंपनी को उम्मीद थी कि सरकार टैक्स माफ करेगी, लेकिन
सरकार ने टैक्स माफ नहीं किया। अगर गाड़ी चलाते है तो डीजल भी मंहगा हो गया है और यात्री नहीं है तथा टैक्स
देना होगा। चालक-परिचालक का वेतन और अन्य खर्चें है। इसलिए घाटे को देखते हुए गाड़ियों को सरेण्डर किया जा रहा
है। 30 जून तक सभी गाड़ियों को सरेण्डर किया जायेगा। उन्होंने बताया कि जीएमओयू ही नहीं उत्तराखण्ड में जितनी भी
परिवहन कंपनियां है वह सभी अपने वाहन सरेण्डर करने जा रही है। शासन से अनुरोध किया था कि मोटर मालिक,
चालक, परिचालक को आर्थिक पैकेज मिलना चाहिए, लेकिन शासन की ओर से केवल एक बार ही चालक-परिचालक को
एक-एक हजार रूपये की आर्थिक सहायता दी गई है। उसकी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जल्द ही चालक-परिचालकों के
खाते में आर्थिक सहायता पहुंच जायेगी। श्री पटवाल ने बताया कि कंपनी के कर्मचारियों को प्रतिमाह 25 लाख रूपये
वेतन दिया जा रहा है। जबकि इस समय आय न के बराबर है। कंपनी के कर्मचारियों को राज्य सरकार के नियमानुसार
वेतन दिया जाता है। कंपनी इसमें कटौती नहीं कर सकती है। कंपनी कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ है। इसलिए
सरकार को कंपनी को आर्थिक सहायता देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि जीएमओयू ने पिछले दो दिन में सौ बसों को
सरेंडर कर दिया है।
प्रदेश सरकार ने भले ही परिवहन निगम की बसों का संचालन शुरू दिया हो, लेकिन निजी परिवहन कंपनियां
अब भी एक वर्ष का टैक्स माफ करने की मांग को लेकर बसों का संचालन नहीं कर रही। गढ़वाल में यातायात की रीढ़
कही जाने वाली गढ़वाल मोटर्स ऑनर्स यूनियन लिमिटेड (जीएमओयू) ने अपनी बसों के कागज परिवहन कार्यालय में
जमा करने शुरू कर दिए हैं। पिछले दो दिन में कंपनी सौ बसों के कागज परिवहन कार्यालय में जमा कर बसों को
सरेंडर कर चुका है। निजी कंपनियों की ओर से मांग की गई कि यदि सरकार कंपनी का एक वर्ष का टैक्स माफ कर
देती है तो कंपनी वाहनों का संचालन शुरू कर देगी। प्रदेश सरकार ने निजी परिवहन कंपनियों की इस मांग पर कोई
ध्यान नहीं दिया। सरकार की उपेक्षा से खिन्न निजी परिवहन कंपनियों ने अपने वाहनों को सरेंडर करते हुए कागजात
परिवहन कार्यालय में जमा करवाने शुरू कर दिए हैं।

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