उत्तरकाशी। जंगलों को वनाग्नि से बचाने और वन संरक्षण में ग्रामीणों की भागीदारी मजबूत करने के लिए वन विभाग ने वन पंचायतों को केंद्र में रखकर रणनीति पर मंथन शुरू किया है। मंगलवार को वन चेतना केंद्र कोटबंगला में मुख्य वन संरक्षक सुशांत कुमार पटनायक के निर्देशन में आयोजित गोष्ठी में वन पंचायत सरपंचों को जंगलों की सुरक्षा में अधिक सक्रिय और जिम्मेदार भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
गोष्ठी में सबसे अधिक जोर वनाग्नि की रोकथाम पर रहा। वन पंचायतों के माध्यम से गांव स्तर पर जागरूकता बढ़ाने, जंगलों में आग लगने की स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना देने, स्थानीय ग्रामीणों को एकजुट करने और आग की घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया की आवश्यकता रेखांकित की गई।इसके साथ ही जंगलों में मानवीय लापरवाही से आग लगने की घटनाओं को रोकने, वन संपदा के संरक्षण तथा क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों के संवर्धन में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। मुख्य वन संरक्षक ने वन पंचायतों के अधिकारों, दायित्वों और वन प्रबंधन में उनकी भूमिका की जानकारी देते हुए कहा कि स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी के बिना जंगलों का प्रभावी संरक्षण संभव नहीं है।