लाखों खर्च करने के बाद भी बदहाल पड़ा बुद्धा पार्क

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पार्क में लगाए गए झूले व बैंच भी असामाजिक तत्वों ने तोड़े
बदहाल स्थिति के बाद पार्क में बच्चों व बुजुर्गों ने घूमना छोड़ा
जयन्त प्रतिनिधि
कोटद्वार: इसे नगर निगम की लापरवाही ही कहेंगे कि जिस पार्क पर पिछले छह साल में लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं, वह अब भी बदहाल पड़ा हुआ है। हालत यह है कि पार्क में लगाए गए झूले व बैंच भी पूरी तरह टूट चुके हैं। जगह-जगह उगी झाड़ियों के कारण बुजुर्ग व बच्चों ने पार्क में घूमना बंद कर दिया है। पार्क असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है।
करीब 70 के दशक में बदरीनाथ मार्ग स्थित एक पार्क में प्रख्यात मूर्तिकार अवतार सिंह पंवार ने भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा का निर्माण किया था, जिसके बाद इस पार्क को ‘बुद्धा पार्क ‘ के नाम से जाना जाने लगा। वर्तमान का आलम यह है कि शाम ढलते ही इस पार्क में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है। पार्क का सुंदरीकरण करवाने के लिए नगर पालिका ने वर्ष 2011-12 में 12 लाख रुपये की धनराशि भी खर्च की थी, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। इसके उपरांत वर्ष 2016 में नगर निगम ने दोबारा पार्क पर 25 लाख रुपये खर्च किए। उक्त धनराशि से पार्क के आसपास दीवार निर्माण के साथ ही विभिन्न प्रकार के झूले, बैंच व अमेरिकन लॉन घास लगाई गई। लेकिन, अब न ही पार्क में झूले नजर आ रहे हैं और न ही बैंच। पार्क में अधिकांश झूले झाड़ियों के बीच खो चुके हैं। पार्क में जगह-जगह टूटे हुए कूड़ेदान के बॉक्स पड़े हुए हैं। क्षेत्रवासी सुदर्शन सिंह ने बताया कि शाम ढलते ही पार्क में असमाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। ऐसे में बच्चों व बुजुर्गों ने पार्क में घूमना भी बंद कर दिया है। बताया कि स्थिति में सुधार के लिए कई बार नगर निगम व प्रशासन को पत्र भेज चुके हैं, लेकिन अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। क्षेत्रवासियों ने पुलिस से भी पार्क में शाम के समय गश्त करवाने की मांग की है। कहा कि इससे असमाजिक तत्वों में खौफ बना रहेगा। वहीं, महापौर हेमलता नेगी ने बताया कि बुद्धा पार्क की स्थिति को सुधारने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। बजट मिलते ही पार्क की स्थिति में सुधार किया जाएगा।

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