जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : प्रखंड रिखणीखाल को उपतहसील का दर्जा मिले लगभग एक दशक का समय हो गया हो। लेकिन, तहसील में अभी तक नियमित तहसीलदार की नियुक्त नहीं हो पाई है। साथ ही उपजिलाधिकारी के बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। नतीजा, ग्रामीणों को मूल निवास, जन्म प्रमाण पत्र सहित तहसील से संबधित कार्यों के लिए लैंसडौन की दौड़ लगानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने रिखणीखाल उपतहसील में स्थाई रूप से तहसीलदार की नियुक्त करने और सप्ताह में दो दिन उपजिलाधिकारी के बैठने की व्यवस्था करवाने की मांग की है।
रिखणीखाल से लैंसडौन की दूरी करीब 60 किलोमीटर है। क्षेत्रीय जन को लैंसडौन जाने में आर्थिक नुकसान होने के साथ ही समय की भी बर्बादी होती है। बताना जरूरी है कि करीब एक दशक पूर्व तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में रिखणीखाल को उपतहसील का दर्जा मिला था। लेकिन, लंबे अंतराल के बाद भी उपतहसील में व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो पाया है। आज भी ग्रामीण लैंसडौन तहसील का चक्कर काटने के मजबूर है। कांडा, तैड़िया, गाडियूं व डिग्री कालेज रिखणीखाल के छात्रों ने ग्राम पंचायत कांडा की ग्राम प्रधान विनीता ध्यानी से इस संबध में चर्चा की। सचिन कुमार, अंकित शिल्पा, जितेंद्र, दीपक, राजेंद्र सिंह, प्रेम सिंह का कहना है कि रिखणीखाल में उपतहसील होने के बावजूद भी उन्हें प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लैंसडौन जाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी तैड़िया, टकोलीखाल, द्वारी, सिलगांव, डबराड, खनेताखाल, कलीगाड, कोलागाड, पट्टी इडियाकोट, बदलपुर के ग्रामीणों को होती है, जहां से ग्रामीणों को लैंसडौन पहुंचने में चार-पांच घंटे लग जाते हैं। कहा कि उपतहसील में नेटवर्किंग की समस्या बनी रहती है, जिससे समय पर काम नहीं हो पा रहे है। जनवरी महीने में होने वाली भर्ती को आवेदन कर रहे युवाओं के समक्ष यह भी बड़ी चुनौती बन गई है, जिसका समय पर समाधान आवश्यक है। ग्राम प्रधान विनीता ध्यानी ने अपर जिलाधिकारी अनिल गब्र्याल से उपतहसील में स्थाई तहसीलदार की नियुक्ति करने व सप्ताह में दो दिन उपजिलाधिकारी के बैठने की व्यवस्था करवाने की मांग की है।