भाजपा ने राज्य की जनता पर थोपा तीसरा मुख्यमंत्री

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अरविंद वर्मा ने एक ओर जहां कोरोना महामारी की तीसरी लहर आने की आशंका जताई जा रही है, भाजपा सरकार की उसके लिए कोई तैयारी नहीं है। भाजपा सरकार ने तीसरी लहर से निबटने की बजाय राज्य की जनता पर तीसरा मुख्यमंत्री थोप दिया है। भाजपा की कथनी और करनी अब जनता के सामने आ चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की जनता और राज्य के विकास की कोई चिंता नहीं है। भाजपा ने दूसरी लहर से पहले भी मुख्यमंत्री को बदला और तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए भी भाजपा ने फिर से मुख्यमंत्री बदल दिया है।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अरविंद वर्मा ने कहा कि संवैधानिक संकट की वजह से तीरथ सिंह रावत ने इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि गंगोत्री सीट पर होने वाले उप चुनाव में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता कर्नल अजय कोठियाल ने जब तीरथ सिंह रावत के विरूद्घ उप चुनाव लड़ने की घोषणा की तो भाजपा घबरा गई। केदारनाथ में आयी आपदा के बाद केदारनाथ के पुननिर्माण में जो कर्नल कोठियाल ने कार्य किया था उससे भी भाजपा घबरायी हुई थी। उत्तराखण्ड में आम आदमी पार्टी के लगातार बढ़ते जनाधार के कारण बीजेपी व कांग्रेस सकते में हैं। इसी कारण भाजपा ने मंथन किया और जो अन्दरूनी सर्वे हुआ जिसमें गंगोत्री में होने वाले उप चुनाव में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी कर्नल अजय कोठियाल भारी मतोंं से जीत रहे थे। जिस कारण भाजपा ने अपने कदम गंगोत्री उपचुनाव से वापस खींच लिए और इसी डर से संवैधानिक संकट का हवाला देते हुए तीरथ सिंह रावत का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिलवा दिया। उत्तराखण्ड में पहली बार किसी सरकार द्वारा 5 वर्षों के कार्यकाल में तीसरा मुख्यमंत्री प्रदेश वासियों पर लाद दिया है।  अरविंद वर्मा ने कहा कि उच्च न्यायालय गुवाहाटी (असम) के द्वारा भी अपने आदेश में यह बात उल्लेखित की है कि उत्तराखण्ड मेंं उप चुनाव करवाये जा सकते थे। भाजपा ने बैकफुट पर जाकर उक्त निर्णय लिया है, क्योंकि भाजपा ने 115 दिन पूर्व ही चार साल का कार्यकाल को पूरा करने वाले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को 10 मार्च 2021 को हटा दिया और उनके स्थान पर सांसद तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बना दिया और अब उपचुनाव में संवैधानिक संकट का हवाला देते हुए तीरथ सिंह रावत का इस्तीफा दिलवाकर उत्तराखण्डवासियों पर तीसरा मुख्यमंत्री लाद दिया है। जो कि उत्तराखण्ड के जनता व राज्य आंदोलनकारियों व राज्य निर्माण के लिए अपनी शहादत देने वाले शहीदों का अपमान है।

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