कोरोना के बीच अब ब्लैक फंगस की दस्तक, दून में अबतक तीन मरीजों में पुष्टि

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देहरादून। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच अब ब्लैक फंगस ने स्वास्थ्य विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। दून स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती एक मरीज में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है, जबकि एक अन्य मरीज में भी इसके लक्षण मिले हैं, जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। अस्पताल में अब तक ब्लैक फंगस के तीन मामले आ चुके हैं।
मैक्स अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ड़ राहुल प्रसाद ने बताया कि उनके यहां भर्ती 60 वर्षीय एक मरीज में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। जबकि दो अन्य मरीज पहले अस्पताल से इलाज करा चुके हैं। इन्हें जनवरी व फरवरी में अस्पताल में भर्ती किया गया था। उन्होंने बताया कि तीनों ही कोरोना से उबर चुके लोग हैं। डा़ प्रसाद का कहना है कि म्यूकर माइकोसिस यानी ब्लैक फंगस कोई नया संक्रमण नहीं है। यह बीमारी र्केसर, एड्स सहित और कई रोगों के साथ भी देखी जाती है। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि राज्य में ब्लैक फंगस का कोई मामला पहली बार आया है।
इतना जरूर है कि कोविड या पोस्ट कोविड मरीजों में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना का इलाज करा चुके कुछ मरीज, जिन्होंने अस्पताल में रिपोर्ट किया उनमें ये देखा गया। साइनस से होते हुए आंख को अपनी चपेट में लेने वाले इस संक्रमण को शरीर में फैलने से रोकने के लिए सर्जरी कर मरीजों की संक्रमित आंख निकालनी पड़ी है। इधर, स्वास्थ्य महानिदेशक ड़ तृप्ति बहुगुणा का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
राज्य में गठित विशेषज्ञ समिति ब्लैक फंगस के संदर्भ में केंद्र व आइसीएमआर की गाइडलाइन और अन्य बिंदुओं को ध्यान में रखकर लाइन अफ ट्रीटमेंट तय करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर अस्पतालों में मरीजों के इलाज के दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। मेरी कोरोना संक्रमित हो चुके मधुमेह के मरीजों से विशेष अपील है कि वे शुगर लेवल को लेकर लापरवाही न बरतें। जो लोग ठीक हो चुके हैं और शुगर की समस्या है तो वो भी शुगर को नियंत्रित रखें। सावधानी ही इस बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।
कोरोना के दौरान या फिर ठीक हो चुके मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। जिसके कारण ब्लैक फंगस अपनी जकड़ में इन मरीजों को आसानी से ले लेता है। कोरोना के जिन मरीजों को डायबिटीज की समस्या है, मधुमेह लेवल बढ़ जाने पर उनमें यह संक्रमण खतरनाक रूप ले सकता है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में बहुत अधिक स्टेरयड, एंटीबायोटिक व एंटी फंगल दबाव के होने से ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा हो रहा है। ब्लैक फंगस के बैक्टीरिया हवा में मौजूद हैं जो नाक के जरिये पहले फेफड़े और फिर खून के जरिये मस्तिष्क तक पहुंच रहे हैं। जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
क्या है ब्लैक फंगस
ब्लैक फंगस यानि म्यूकोरमाइकोसिस शरीर में बहुत तेजी से फैलने वाला एक तरह का फंगल इंफेक्शन है। यह फंगल इंफेक्शन मरीज के दिमाग, फेफड़े या फिर स्किन पर भी अटैक कर सकता है। इस बीमारी में कई मरीजों के आंखों की रोशनी चली जाती है। वहीं, कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी गल जाती है। अगर समय रहते इसे कंट्रोल न किया गया तो इससे मरीज की मौत भी हो सकती है।ादि किसी व्यक्ति का शुगर लेवल बहुत अधिक है तो ऐसे लोगों के ब्लैक फंगस से संकलित हो जाने का खतरा ज्यादा रहता है। साथ ही कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों पर ब्लैक फंगस तेजी से हमला करता है।

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