शीतोष्ण फलों की खेती आर्थिकी का एक सशक्त माध्यम: रौथाण

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श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल विवि के उद्यानिकी विभाग, धाद संस्था दून एवं उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में शीतोष्ण गुठलीदार फलों का व्यावसायिक उत्पादन चुनौतियों एवं अवसर विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गढ़वाल विवि के कुलपति प्रो. एमएमएस रौथाण ने कहा कि शीतोष्ण फलों की खेती उत्तराखंड की आर्थिकी का एक सशक्त माध्यम है। कहा कि किसान शीतोष्ण फलों की खेती कर अपना रोजगार सृजन कर अच्छी आय कमा सकते हैं।प्रो. रौथाण ने कहा कि वर्तमान समय में हमारे लिए जलवायु परिवर्तन एक बहुत बड़ी चुनौती है। वर्तमान समय में बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और चरम मौसम की घटनाओं के कारण उत्तराखंड में पारम्परिक सेब, आडू जैसे शीतोष्ण फलों की किस्मों की पैदावार कम हो रही है। कहा कि यदि शीतोष्ण फलों की खेती, सही तकनीकों और वैज्ञानिक मार्गदर्शन से की जाए तो यह किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। कार्यशाला में अति विशिष्ट अतिथि डॉ. एमसी नौटियाल ने बदलते जलवायु परिदृश्य में शीतोष्ण फल उत्पादन की चुनौतियों और उनसे निपटने की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि धाद संस्था के अध्यक्ष लोकेश नवानी ने संस्था की ओर से किए जा रहे कार्यों को किसानों के सम्मुख रखा। मौके पर प्रगतिशील कृषक कुंदन सिंह पंवार, प्रो. अजीत सिंह नेगी, डीएसडब्ल्यू प्रो. ओपीएस गुसांई, हैप्रेक संस्थान के निदेशक डॉ. विजयकांत पुरोहित,डा. सुदीप सेमवाल, डा. प्रदीप डोभाल, डा. जयदेव चौहान, तन्यम मंमगाई, हरीश डोबरियाल, देवेंद्र सिंह, पवन, सुरेंद्र आदि मौजूद थे।

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