12 सूत्रीय मांगों पर शासनादेश जारी करने की मांग पर डटी आशा

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। राजकीय कर्मचारी घोषित करने और मानदेय बढ़ाए जाने सहित 12 सूत्रीय मांगों को लेकर की मांग को लेकर 57वें दिन भी आशाओं का प्रदर्शन जारी रहा। आशा कार्यकत्रियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार शासनादेश जारी नहीं करेगी तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। सरकार को परिवार के भरण पोषण लायक उन्हें मानदेय देना चाहिए।
सोमवार को तहसील परिसर में धरना स्थल पर सभा को संबोधित करते हुए अध्यक्ष प्रभा चौधरी ने कहा कि आशाओं को प्रदर्शन करते हुए 57 दिन बीत चुके हैं लेकिन सरकार आंखों पर पट्टी बांधकर बैठी है। आशाओं के कार्य बहिष्कार से पल्स पोलियो का प्रचार नहीं हुआ, जिससे बूथ का टारगेट पूरा नहीं हुआ। गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण नहीं हो पा रहा है। बच्चों का टीकाकरण प्रभावित हो रहा है। उन्होने कहा कि जब तक आशाओं की सारी मांगे पूरी नहीं हो जाती तब तक कार्यबहिष्कार जारी रहेगा। सरकार मांगों पर जल्द से जल्द शासनादेश जारी करें। आशाओं ने प्रदेश सरकार से सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम 21 हजार रुपये का मानदेय देने, जब तक मानदेय और कर्मचारियों का दर्जा मिलने तक अन्य विभागों से योजनाओं में लगे कार्मिकों की तरह मानदेय देने, सेवानिवृत्त होने पर पेंशन की सुविधा देने, कोविड कार्यों में लगी आशा कार्यकत्रियों को दस हजार रुपये मासिक भत्ता, 50 लाख रुपये का बीमा और दस लाख का स्वास्थ्य बीमा देने सहित 12 सूत्रीय मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की। प्रदर्शन करने वालों में अध्यक्ष प्रभा चौधरी, उपाध्यक्ष मीरा नेगी, सचिव रंजना कोटनाला, नीलम कुकरेती, सुमित्रा भट्ट, गीता जदली, प्रीति, सुमित्रा पंत, ऊषा, रेखा, रीता देवी, कल्पना बिष्ट, कल्पना काला, बसंती रावत, सीमा शाही, सुनीता रावत, रजनी, विनीता काला, सुमन राठौर, मुन्नी नयाल, कुसुम, कमला शाह, वीना वछवाण, गीता देवी, ललिता, राखी रावत, कलावती, हेमलता चौहान, दीपा, सुनीता, सुरभि, संजू नेगी, रेनू, गोदाम्बरी, आशा शामिल थे।

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