हाईकोर्ट को गैरसैंण में स्थापित करने की मांग उठी

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नैनीताल। अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट को मैदान के बजाय गैरसैंण में स्थापित किए जाने की मांग उठाई है। अधिवक्ताओं ने कहा यदि हाईकोर्ट गैरसैंण में स्थापित होगा तो पहाड़ के विकास में यह एक मील का पत्थर साबित होगा। गैरसैंण में पर्याप्त भूमि व संसाधन उपलब्ध हैं। हाईकोर्ट बनने से आधारभूत ढांचे का विकास होगा। आसपास के इलाकों के विकास में भी यह महत्वपूर्ण साबित होगा। मंगलवार को हाईकोर्ट बार सभागार में हाईकोर्ट को नैनीताल से अन्यत्र शिफ्ट न करने को लेकर फिर से बैठक हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व सांसद महेन्द्र सिंह पाल ने पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी को जन्मदिन पर याद किया। उन्होंने कहा कि कुछ उत्तराखंड विरोधी लोग नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्टिंग की बात कर रहे हैं। कहा कि हाईकोर्ट को पहाड़ पर ही रखा जाना चाहिए। युवा अधिवक्ता मुकेश रावत ने कहा कि हाईकोर्ट को नैनीताल से शिफ्ट नहीं किया जाना चाहिए अगर सरकार चाहती है कि हाईकोर्ट नैनीताल से कहीं शिफ्ट हो तो गैरसैंण में हो। कहा कि वह गैरसैंण में अधिवक्ताओं के आवास के लिए अपनी जमीन मुफ्त देने को तैयार हैं। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रशांत जोशी ने कहा कि गैरसैंण एक आदर्श स्थान है। विनोद तिवाड़ी ने कहा कि नैनीताल हाईकोर्ट की स्थापना के 22 साल बाद भी प्रवासी उत्तराखंडी पहाड़ से हाईकोर्ट शिफ्टिंग की बात करते हैं यह उनकी उत्तराखंड विरोधी सोच को दर्शाता है। योगेश पचोलिया ने कहा कि हाईकोर्ट को गैरसैंण में स्थापित किया जाना चाहिए। यहां अधिवक्ता टीसी पांडे, देवेश विश्नोई, मयंक पांडे, हेमा शाही, नवीन आर्या, अजय बहुगुणा, शक्ति प्रताप सिंह, भुवनेश जोशी नवनीश नेगी, सुहास रतन जोशी, विजयलक्ष्मी फर्तयाल, नवनीश नेगी, बिजयन्त पंत, डीके जोशी, बीएस कोरंगा, शैलेन्द्र नौरियाल, शिवानन्द भट्ट, केके तिवारी, महावीर कोहली, हिमांशु असवाल, अपूर्व चौहान, त्रिलोचन पाण्डे, एनके पपनोई, कैलाश चन्द्र तिवारी, जयवर्धन काण्डपाल, सुहास रतन जोशी, भुवनेश जोशी, योगेश पचौलिया, बीएस रावत सहित कई अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।

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