आज भी सिर पर बोझा रखकर मीलों पैदल चलने को मजबूर हैं दुबलाणवासी

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-सालों से ग्रामीण उठा रहे हैं सड़क निर्माण की मांग
-नहीं हो रही किसी भी स्तर पर सुनवाई, ग्रामीणों में आक्रोश
जयन्त प्रतिनिधि
कोटद्वार : राज्य सरकार की ओर से प्रदेश के प्रत्येक गांव को सड़क से जोड़ने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन कई गांवों के ग्रामीण आज भी मीलों की दूरी पैदल नापने को मजबूर हैं। कुछ ऐसी ही समस्या झेल रहे हैं चौबट्टाखाल क्षेत्र के साबली पट्टी के गांव दुबलाण के ग्रामीण। यहां के ग्रामीण आज भी बोझ को सिर पर रखकर कई किमी पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं, तब जाकर उन्हें कोई वाहन सहारा दे पाता है।
ग्राम प्रधान पान सिंह नेगी व बीरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्र में सड़क की मांग कर रहे हैं। लेकिन आज तक सरकार ने ग्रामीणों की सुध नहीं ली। सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को पैदल ही आवाजाही करनी पड़ती है। सबसे ज्यादा दिक्कत मरीजों को अस्पताल तक ले जाने में आती है। इसके अलावा घर का सामान आदि भी सिर पर ढोकर ले जाना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश में अच्छी सड़कों के दावे तो कर रही है, लेकिन दुबलाण गांव के ग्रामीणों को आज तक सड़क उपलब्ध न होना सरकार की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि गांव में अधिकतर परिवार रक्षा क्षेत्र में देश सेवा कर रहे अथवा सेवानिवृत सैनिक व निर्धन कृषक हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि इन ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जाए।

ग्रामीण पलायन को मजबूर
सरकार पलायन रोकने के दावे तो कर रही है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में आज भी दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीण शहर में पलायन को मजबूर हैं। दुबलाण गांव की भी यही कहानी है। यहां के ग्रामीण भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में शहरों में बसने लगे हैं। अगर जल्द ही सरकार ने इस गांव में सुध नहीं ली तो आने वाले समय में यह गांव भी खाली हो जाएगा।

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