लैंसडाउन सहित शहरों के नाम बदले पर गरमाया माहौल, पूर्व सीएम हरीश रावत ने उठाए सवाल

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देहरादून। लैंसडोन का नाम बदलने की तैयारी पर कांग्रेस ने सवाल उठाए। पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि जब सरकारों के पास जनता को बताने के लिए कुछ नहीं होता है, तब वो पुराने कभी ब्रिटिश कालीन, कभी मुगलकालीन नामों को बदलने का एक प्रपंच रचते हैं। बेहतर होता कि सरकार नाम बदलने की बजाय अंग्रेजों के समय के कानून बदलती। जिनसे लैंसडोन की जनता घुट रही है।
पूर्व सीएम ने नाम बदलने को सरकार की अपनी विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। कहा कि अब यही कहानी उत्तराखंड में भी दोहराई जा रही है। लैंसडाउन एक विश्व प्रसिद्घ नाम है। सरकार नाम तो बदल रही है। लेकिन अंग्रेजों के उस कानून, जिससे वहां की नागरिक आबादी है का दम घुट रहा है, उसे नहीं बदल रही है।
उसी तरीके से देहरादून में भी कुछ र्केट क्षेत्र हैं। मसूरी में भी हैं। यहां भी कुछ नाम अंग्रेजों ने रखे हैं। यह विश्व प्रसिद्घ नाम हैं। मसूरी विश्व प्रसिद्घ नाम है। क्या सरकार उसका भी नाम बदलेगी। लैंसडाउन और रानीखेत विश्व प्रसिद्घ नाम है। नैनीताल को छोटा लंदन भी कहा जाता था। ऐसे में क्या सरकार उसका भी नाम बदलेगी।
क्योंकि उसके साथ अंग्रेजों की पहचान लगी हुई है। नाम बदलना भारतीय जनता पार्टी का जुमला है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को इस जुमले में फंसने की बजाय राज्य के लोगों के भाग्य बदलने के काम में लगना चाहिए। कुछ काम जमीन पर दिखाना चाहिए। जिससे लोग कह सकें कि हमारी सरकार है।

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