पाकिस्तान में हिंदू किसान की गोली मारकर हत्या, जमींदार के खिलाफ सड़कों पर उतरा सैलाब; 24 घंटे से जाम हैं हाईवे

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इस्लामाबाद , पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का एक और गंभीर मामला सामने आया है। यहां बदीन जिले में एक प्रभावशाली जमींदार ने जमीन विवाद को लेकर एक युवा हिंदू किसान की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान कैलाश कोलही के रूप में हुई है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव है और अल्पसंख्यक समुदाय का गुस्सा फूट पड़ा है। आरोपी सरफराज निजामानी पर आरोप है कि उसने अपनी जमीन पर एक झोपड़ी बनाने को लेकर हुए मामूली विवाद में कैलाश की जान ले ली।
लाश रखकर हाईवे जाम, बच्चे-बुजुर्ग सब सड़क पर
कैलाश की हत्या के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। गुस्साए लोगों ने बदीन-हैदराबाद राष्ट्रीय राजमार्ग और बदीन-थार कोयला सड़क पर शव रखकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए जाम के कारण सैकड़ों वाहन पिछले कई घंटों से फंसे हुए हैं। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने साफ कर दिया है कि जब तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और मासूम बच्चे भी शामिल हैं, जो कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे इंसाफ की मांग कर रहे हैं।
‘यह धरना नहीं, जख्मी जमीर की आवाज हैÓ
सामाजिक कार्यकर्ता और पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद के चेयरमैन शिवा काच्छी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्सÓ पर इस आंदोलन की तस्वीरें साझा करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि कल सुबह 10 बजे से शुरू हुआ यह धरना बिना रुके जारी है। काच्छी ने भावुक होते हुए कहा कि यह केवल भीड़ नहीं, बल्कि एक जख्मी जमीर की आवाज है। उन्होंने कहा कि कैलाश कोलही का एकमात्र अपराध उसका गरीब और हाशिए पर होना था। उसके बच्चों के आंसू और विधवा की खामोश पीड़ा आज पाकिस्तान के पूरे सिस्टम से सवाल पूछ रही है कि क्या यहां गरीबों का खून इतना सस्ता है?
24 घंटे के आश्वासन के बाद भी पुलिस के हाथ खाली
यह घटना चार दिन पहले पीरू लशारी शहर क्षेत्र के राहो कोलही गांव में हुई थी। हत्या के तुरंत बाद पीड़ित परिवार ने पीरू लशारी स्टॉप पर प्रदर्शन किया था, तब एसएसपी बदीन ने भरोसा दिलाया था कि 24 घंटे के भीतर आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। लेकिन पुलिस के आश्वासन के बावजूद अब तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, जिससे लोगों का सब्र टूट गया है। पुलिस की निष्क्रियता ने लोगों को दोबारा और बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर कर दिया है।

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