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ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश, वाराणसी के जिला जज करें मुकदमे की सुनवाई

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नई दिल्ली, एजेंसी। वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि मस्जिद के अंदर पूजा के मुकदमे की सुनवाई जिला न्यायाधीश द्वारा की जाए। वाराणसी के जिला न्यायाधीश मस्जिद समिति की याचिका पर फैसला करेंगे कि हिंदू पक्ष द्वारा मुकदमा चलने योग्य नहीं है और तब तक अंतरिम आदेश-शिवलिंग क्षेत्र की सुरक्षा, नमाज के लिए मुसलमानों को मुफ्त प्रवेश-जारी रहेगा। कोर्ट ने कहा कि जिला जज के पास 25 साल का लंबा अनुभव है। इस मामले में सभी पक्षों के हित को सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही यह भी कहा कि यह न समझा जाए कि हम मामले को निरस्त कर रहे हैं। आपके लिए आगे भी हमारे रास्ते खुले रहेंगे।
हिंदू पक्ष के वकील अधिवक्ता विष्णु जैन ने बताया कि ज्ञानवापी मस्जिद मामले पर सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि मामले की सुनवाई जिला जज वाराणसी करेंगे। कोर्ट का कहना है कि शिवलिंग क्षेत्र की सुरक्षा के लिए 17 मई का उसका अंतरिम आदेश जारी रहेगा। वुजू की व्यवस्था की जाएगी। हम आदेश से बहुत खुश हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले को जिला न्यायाधीश वाराणसी को स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा के वरिष्ठ और अनुभवी न्यायिक अधिकारी मामले की सुनवाई करेंगे।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट का सर्वे के दौरान मस्जिद परिसर में मिले शिवलिंग की जगह की सुरक्षा करने का अंतरिम आदेश लागू रहेगा।
मस्जिद कमेटी के वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा शुरू से ही पारित सभी आदेश बड़ी सार्वजनिक शरारत करने में सक्षम हैं।
सुप्रीम कोर्ट वाराणसी जिला अदालत के आदेश के खिलाफ अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में प्रसिद्घ काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफिक सर्वेक्षण का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वाराणसी की ट्रायल कोर्ट को नंदी के सामने बनी दीवार को न गिराने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि मामले में फिलहाल कोई भी आदेश ना दिया जाए। वहीं शीर्ष न्यायालय ने वाराणसी कोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई गुरुवार के लिए टालने को कहा था। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने सुनवाई टालने का विरोध किया था। उनका कहना था कि अगर सुनवाई टाली जाती है तो देश में कई और ऐसे मामले डाले जा सकते हैं।

 

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