नई दिल्ली/दार एस सलाम, भारत और तंजानिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए व्यापार, निवेश, रक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) तथा विकास सहयोग सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) के दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और तंजानिया के बीच विदेश कार्यालय परामर्श का आयोजन 22 जुलाई 2026 को तंजानिया की राजधानी दार एस सलाम में हुआ। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया एवं दक्षिणी अफ्रीका) जनेश काइन तथा तंजानिया के विदेश मामलों एवं पूर्वी अफ्रीकी सहयोग मंत्रालय के एशिया एवं ऑस्ट्रेलिया विभाग की निदेशक फेलिस्टर रुगाम्बवा ने की।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करते हुए व्यापार एवं निवेश, विकास सहयोग, रक्षा और सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृषि, स्वास्थ्य, संस्कृति तथा लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
एफओसी के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे संयुक्त सचिव जनेश काइन ने तंजानिया के विदेश मामलों एवं पूर्वी अफ्रीकी सहयोग मंत्रालय के स्थायी सचिव राजदूत डॉ. सैमवेल विलियम शेलुकिंडो से भी मुलाकात की। दोनों अधिकारियों ने आपसी सहयोग को और व्यापक बनाने तथा विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर विचार साझा किए।
बैठक में दोनों देशों ने आपसी सहमति से जल्द ही संयुक्त आयोग बैठक (जेसीएम) और संयुक्त रक्षा सहयोग समिति की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के उन विषयों पर भी चर्चा हुई, जिनमें भारत और तंजानिया की समान रुचि है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग की सराहना की गई। साथ ही यह भी तय हुआ कि विदेश कार्यालय परामर्श का अगला दौर आपसी सुविधा के अनुसार भारत में आयोजित किया जाएगा।
भारत और तंजानिया के बीच हुई यह वार्ता दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के साथ-साथ आर्थिक, सुरक्षा और विकास सहयोग को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।