कोटद्वार-दुगड्डा मार्ग पर आमजन को मार्च तक झेलनी पड़ेगी आफत

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रॉक बोल्ट तकनीक फेल होने के बाद अब कंक्रीट तकनीक से बनाया जा रहा है पुश्ता
-पांचवी मील के पास पुश्ता तैयार होने में लगेगा मार्च तक का समय, तब जान हथेली में रखकर करना होगा सफर
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : नजीबाबाद-बुआखाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर अभी मार्च तक सफर आसान नहीं होने वाला है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोटद्वार से दुगड्डा जाते हुए पांचवी मील के पास अभी भी दिक्कत बनी हुई है। जिससे वाहनों को जान हथेली पर रखकर इस मार्ग से आवाजाही करनी पड़ रही है। हालांकि, पुलिस व नेशनल हाईवे डिपार्टमेंट यहां पर एहतियात के तौर पर तमाम व्यवस्थाएं बनाने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद कब कोई अनहोनी हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है।
दरअसल बीते दिनों कोटद्वार-दुगड्डा मार्ग पर पांचवी मील के पास भूस्खलन होने से पूरा मार्ग धंस गया था। जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई थी। फौरी तौर पर नेशनल हाईवे डिपार्टमेंट ने पहाड़ी का कटान कर मार्ग खोला और वाहनों की आवाजाही सुचारू करवाई। इसके साथ ही यहां पर पुश्ता निर्माण के लिए भी प्रयास तेज किए गए। शुरुआत में यहां पर रॉक बोल्ट तकनीक से पुश्ता बनाने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन लगातार भूस्खलन होने से यह तकनीक काम नहीं आ पाई। जिससे अब यहां पर कंक्रीट तकनीक से पुश्ता बनाने का कार्य किया जा रहा है। एनएच के जूनियर इंजीनियर अरविंद जोशी का कहना है कि इस काम को पूरा होने में मार्च तक का समय लग जाएगा। तब तक वाहनों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

पहाड़ी क्षेत्र पूरी तरह से है कोटद्वार पर निर्भर
कोटद्वार-दुगड्डा मार्ग के महत्व की बात करें तो यह प्रमुख मार्ग है जो कोटद्वार को पहाड़ी क्षेत्रों से जोड़ता है। कोटद्वार में बेस अस्पताल से लेकर तमाम विभागों के कार्यालय होने के चलते आए दिन पहाड़ी क्षेत्रों के लोग यहां आते हैं। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में सब्जी, फल, राशन आदि की पूर्ति भी अधिकांश कोटद्वार से ही होती है। हालांकि, अभी इस मार्ग पर किसी तरह आवाजाही हो पा रही है, लेकिन अगर यह वैकल्पिक व्यवस्था भी जवाब दे जाती है तो इन पहाड़ी क्षेत्रों का कोटद्वार से पूरी तरह से संपर्क टूट जाएगा। साथ ही ग्रामीणों को इलाज से लेकर तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

मार्ग पर रहता है वाहनों का बहुत अधिक दबाव
कोटद्वार-दुगड्डा मार्ग पर प्रतिदिन वाहनों का बहुत अधिक दबाव रहता है। अभी इस मार्ग पर पांचवी मील के पास मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण पहले एक तरफ के वाहनों को जाने की अनुमति दी जा रही है, जब इधर से ट्रैफिक दबाव कम होता है तब दूसरी तरफ से वाहनों को जाने की इजाजत दी जाती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में लोगों को लंबे जाम से भी जूझना पड़ रहा है। समस्या तब बड़ी हो जाती है, जब इस मार्ग पर किसी एंबुलेंस को जाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है।

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