कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह बोले शिक्षक राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण धुरी

एचएनबी गढ़वाल विवि में चार दिवसीय राष्ट्रीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम शुरू
जयन्त प्रतिनिधि।
श्रीनगर गढ़वाल : हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ एवं राष्ट्रीय नवोदय नेतृत्व संस्थान, नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में जवाहर नवोदय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए चार दिवसीय राष्ट्रीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम सोमवार को शुरू हो गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, नवीन तकनीकों एवं समकालीन शैक्षिक आवश्यकताओं के लिए दक्ष बनाना है। कार्यक्रम में उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश के नवोदय विद्यालयों से आए 46 शिक्षक-शिक्षिकाएं प्रतिभाग कर रहे हैं।


उद्घाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अतिथियों का पारंपरिक शॉल, स्मृति चिह्न एवं तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। शोधार्थी स्नेहलता ने विश्वविद्यालय के कुलगीत की सांकेतिक भाषा में प्रस्तुति देकर समावेशिता एवं सुलभ शिक्षा का प्रेरक संदेश दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। ऐसे क्षमता संवर्धन कार्यक्रम शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के साथ-साथ समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों के लिए विषयगत ज्ञान के साथ तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक कौशल एवं नवीन शिक्षण तकनीकों की समझ भी आवश्यक है। शिक्षकों को आधुनिक तकनीक एवं नवाचारों को कक्षा-कक्ष तक पहुंचाने के साथ उन्हें विद्यार्थियों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान के संवाहक नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के चरित्र, विचार एवं सामाजिक चेतना के निर्माणकर्ता भी हैं। राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि दून विश्वविद्यालय, देहरादून की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने अपने संबोधन में शिक्षकों के व्यावसायिक विकास, भावनात्मक जुड़ाव एवं संस्थागत अपनत्व को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि बदलती शैक्षिक परिस्थितियों में शिक्षकों को अपनी शिक्षण पद्धतियों एवं व्यावसायिक दक्षताओं का निरंतर विकास करना आवश्यक है। भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों, स्थानीय संदर्भों एवं आधुनिक शैक्षिक दृष्टिकोण के समन्वय से दक्ष एवं संवेदनशील शिक्षक तैयार किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल विषयगत ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आलोचनात्मक चिंतन एवं नैतिक मूल्यों का विकास करना भी उनका महत्वपूर्ण दायित्व है। इस अवसर पर डीन नियुक्ति एवं प्रोन्नति प्रो. एम.एस. पंवार, बिरला परिसर के निदेशक प्रो. एच.बी.एस. चौहान, कुलसचिव प्रो. वाई.पी. रैवानी, प्रो. सुनीता गोदियाल, प्रो. एम.एम. सेमवाल, प्रो. आर.एस. नेगी, प्रो. गुड्डी बिष्ट, प्रो. वी.आर. पुरोहित, डॉ. शंकर सिंह, डॉ. सुमन लता तिरुवा, डॉ. सपना सेन, डॉ. रमेश राणा, डॉ. सिद्धार्थ लोहानी एवं डॉ. आलोक सागर गौतम आदि मौजूद थे।

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