लक्षद्वीप ने 17 द्वीपों में प्रवेश पर लगाई रोक, राष्ट्रीय सुरक्षा का दिया हवाला

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कवरत्ती, एजेंसी। लक्षद्वीप प्रशासन ने गुरुवार को राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए कुल 36 द्वीपों में से 17 में प्रवेश पर रोक लगा दी है। इन 17 द्वीपों में कोई आबादी निवास नहीं करती है और यहां जाने के लिए सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) से प्रवेश की अनुमति आवश्यक है।
लक्षद्वीप के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (डीएम) ने इस संबंध में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत औपचारिक अधिसूचना जारी की। आतंकवादी या तस्करी गतिविधियों को रोकने के लिए बुधवार को इन द्वीपों में प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला बुधवार को लिया गया था।
प्रशासन ने कहा कि उन द्वीपों में अवैध, असामाजिक और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल लोग हो सकते हैं, इसलिए यह फैसला लिया गया है। प्रशासन ने आदेश में कहा, चूंकि कुछ गैर-आबाद द्वीपों पर नारियल की कटाई करने वाले मजदूरों के आवास के रूप में अस्थायी ढांचे हैं, इसलिए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इन मजदूरों के साथ-साथ ऐसे व्यक्ति भी हैं जो अवैध, असामाजिक और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों जैसे तस्करी, हथियार या नशीले पदार्थों को छिपाने के कामों में शामिल हैं।
आदेश में कहा गया है कि आतंकी समूहों या संगठनों द्वारा देश के महत्वपूर्ण संस्थानों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर हमला करने और उन्हें नुकसान पहुंचाने की संभावना को देखते हुए एहतियाती उपाय जरूरी हैं।
आदेश में कहा गया है कि आतंकी समूहों या संगठनों द्वारा देश के महत्वपूर्ण संस्थानों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर हमला करने और उन्हें नुकसान पहुंचाने की संभावना को देखते हुए एहतियाती उपाय जरूरी हैं। डीएम ने अपने आदेस में कहा, आतंकवाद, हिंसा और राष्ट्र विरोधी अवैध और असामाजिक गतिविधियों की संभावना के साथ-साथ देश के महत्वपूर्ण सैन्य और अर्ध-सैन्य, औद्योगिक और धार्मिक स्थानों पर हमलों के जरिए लोगों में भय और आतंक को रोकने के लिए मुझे लक्षद्वीप के 17 गैर आबाद द्वीपों में बिना पूर्व लिखित अनुमति के प्रवेश पर रोक लगाना उचित लगता है।

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