नई टिहरी। भू भूम्याल जागृति मंच की ओर से उत्तराखंड के भविष्य पर मंथन को लेकर राजनीतिक, सामाजिक संगठनों की विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गाेष्ठी में इस बात पर हर कोई एकमत दिखा कि उत्तराखंडियत को बचाए रखने के लिए बड़े संघर्ष की जरूरत है। खासकर मूल निवास, सख्त भू-कानून, पलायन रोकने, प्रदेश के हक-हकूकों पर मूल निवासियों का हक और उत्तराखंड को संविधान की अनुसूचि-5 में शामिल कर राज्य के वाशिंदों को वनवासी घोषित कर जनजातीय अधिकार दिए जाएं। कहा कि गोष्ठी के निचोड़ का एक ड्रॉफ्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगा। भू-भूम्याल जागृति मंच के संयोजक देवेंद्र नौडियाल, सह संयोजक अमित पंत के आह्वान पर रविवार को बौराड़ी में आयोजित चिंतन गोष्ठी में विभिन्न जिलों से मीडिया, सोशल, राजनीतिक और सामाजिक एक्टिविस्ट पहुंचे। टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय ने परिसीमन को लेकर सजग किया। कहा कि वह अगले विधानसभा सत्र में उत्तराखंड में परिसीमन भौगोलिक आधार पर हो, इसका प्रस्ताव रखेंगे। कहा कि प्रदेश में न्यूनतम 101 विधानसभा सीटें हों। खासकर पहाड़ों में 31 नई सीटें बढ़ें। प्रतापनगर विधायक विक्रम नेगी ने पलायन पर चिंता जताई। कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सहित रोजगार के अवसर पहाड़ियों से छीनने के कारण आज पलायन बढ़़ रहा है। मिलकर समाधान की जरूरत है। पत्रकार गजेंद्र रावत ने मूल निवास और संपूर्ण उत्तराखंड के लिए एक ही सख्त भू-कानून पर जोर दिया। त्रिभुवन चौहान,मूल निवास भूकानून समन्वय समिति के मोहित डिमरी, महीपाल सिंह नेगी, शांति प्रसाद भट्ट,अभिनव थापर ने हिमाचल की भांति सख्त भू-कानून, आपदा, जिला विकास प्राधिकरणों को समाप्त करने, टिहरी बांध में हिस्सेदारी सहित 11 ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई। इस मौके पर पूर्व पालिकाध्यक्ष उमेश चरण गुसाईं,जगमोहन नेगी,डॉ.महावीर नेगी, प्रांजल नौडियाल, अरण्य रंजन, बीना सजवाण, अनुसूया नौटियाल, साब सिंह सजवाण, सोहन राणा, सुंदर लाल उनियाल, मेहरबान सिंह नेगी, चंद्रवीर नेगी,राजेंद्र बहुगुणा, शक्ति जोशी,भगवान सिंह रावत,अनूप बिष्ट,उर्मिला राणा,रजनी भट्ट आदि मौजूद थे।