कोलकाता , पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (ञ्जरूष्ट) प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें एक बार फिर से बेहद बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। कोलकाता में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान बांग्लादेश के एक बेहद हाई-प्रोफाइल हत्याकांड के तार भारत के केंद्रीय गृह मंत्रालय और गृह मंत्री अमित शाह से जोड़ने के आरोप में उनके खिलाफ एक आपराधिक एफआईआर (स्नढ्ढक्र) दर्ज की गई है। यह हाई-प्रोफाइल शिकायत सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक स्थानीय महिला वकील द्वारा दर्ज कराई गई है, जिससे राज्य की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है।
आखिर क्या है पूरा मामला
यह पूरा विवाद बीते 2 जून 2026 को कोलकाता के धर्मतला (ङ्घ-चैनल) में टीएमसी द्वारा आयोजित एक धरना प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ। मंच से अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि उन्हें बांग्लादेश में हुई एक ‘बड़ी हत्याÓ के पीछे की पूरी साजिश और उसमें शामिल मास्टरमाइंड्स के नामों की पूरी जानकारी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह उन नामों का खुलासा नहीं करेंगी क्योंकि इससे पड़ोसी देश बांग्लादेश में भारी उथल-पुथल मच सकती है। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि उनका यह सीधा इशारा बांग्लादेशी छात्र नेता शरीफ उस्मान बिन हादी की बहुचर्चित हत्या की तरफ था।
गृह मंत्रालय पर साधा था निशाना
पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, ममता बनर्जी ने धरना स्थल से खुलेआम कहा था, हमारी एसटीएफ (स्ञ्जस्न) ने बांग्लादेश से एक बहुत बड़े हत्यारे को गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी को लेकर बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी हुआ था। मैं यहां दूसरे देशों की बात नहीं कर रही, बल्कि मेरा मुख्य पॉइंट यह है कि वे लोग मेघालय के रास्ते हमारे बंगाल में दाखिल हुए। यहां आने के बाद हमारी मुस्तैद एसटीएफ ने उन्हें दबोचा। गृह मंत्री खुद कह रहे हैंज् मैंने इतने दिनों तक इस पर कुछ नहीं कहा, लेकिन आज जब अत्याचार अपनी चरम सीमा पार कर गया है, तब मुझे बोलना पड़ रहा है। मेरा हृदय सत्य का भंडार है।
देश की सुरक्षा को बताया खतरा
ममता बनर्जी के इस विवादित और सनसनीखेज भाषण के तुरंत बाद सिलीगुड़ी की रहने वाली वकील रिंकी चटर्जी सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ कानूनी मामला दर्ज करा दिया। शिकायतकर्ता वकील का आरोप है कि ममता बनर्जी ने अपने इस राजनीतिक भाषण में बिना किसी ठोस आधार के देश के शीर्ष गृह मंत्रालय का नाम घसीटा है। एफआईआर के अनुसार, एक सार्वजनिक और खुले मंच से देश के प्रशासन, खुफिया तंत्र तथा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ी इतनी संवेदनशील और खुफिया जानकारी को सार्वजनिक करने से भारत की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। आपको बता दें कि शिकायत दर्ज कराने वाली इसी महिला वकील ने पिछले सप्ताह भी साइबर क्राइम थाने में एक अन्य मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।