प्रेम पूजा है, भक्ति है, सुमिरन भी है

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हिंदी साहित्य भारती की ओर से आयोजित की गई ऑनलाइन काव्य गोष्ठी
जयन्त प्रतिनिधि।
श्रीनगर।
हिंदी साहित्य भारती (अंतर्राष्ट्रीय) उत्तराखंड की पौड़ी जनपद कार्यकारिणी की ओर से ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में शामिल कवि और कवयित्रियों ने भावपूर्ण रचनाओं की प्रस्तुति दी। गोष्ठी का प्रारंभ हिंदी साहित्य भारती के जनपद महामंत्री रोशन बलूनी ने सरस्वती वंदना से किया।
ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में उभरती हुई कवयित्री साईनी कृष्ण उनियाल ने प्रेम को सुंदर अभिव्यक्ति देते हुए प्रेम पूजा है, भक्ति है, सुमिरन भी है कविता की प्रस्तुति दी। जबकि राधा मैंदोली माधवी ने आ रही है साम, श्यामल प्रीति की चादर लिए, रोशन बलूनी ने कोरोनाकाल में योग के महत्त्व को रेखांकित करते हुए तू योग के सहारे, जीवन संवार अपना, दिनेश चन्द्र पाठक बशर ने भूख और रोटी का बस फर्क जानता है, गीता कुरान के कब वो हर्फ जानता है कविता का पाठ किया। हिंदी साहित्य भारती की प्रदेश महामंत्री कविता भट्ट शैलपुत्री ने अपनी शृंगारपरक रचना धड़कने बदल रही करवटें आजकल, चाँद के माथे पर हैं सलवटें आजकल का पाठ किया। कार्यक्रम के समापन में प्रसिद्ध साहित्यकार तथा हिंदी साहित्य भारती के प्रदेश अध्यक्ष बुद्धिनाथ मिश्र सभी उपस्थित साहित्यकारों को साहित्य सृजन से संबंधित गुर बताते हुए अपने साहित्यिक अनुभव सुनाए। उन्होंने के मौत से भी दिल्लगी की बात कर पक्तियों के साथ काव्य गोष्ठी का समापन किया।

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