34 हजार से अधिक प्रवासियों ने गांवों को बनाया अपना ठोर

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जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी।
कोरोना की दूसरी लहर में गांव वापस लौटने वालो में देश के अन्य हिस्सों से सबसे ज्यादा प्रवासियों ने गांवों को अपना ठोर बनाया है। इन प्रवासियों का मुख्य केंद्र दिल्ली, गुडगांव, चंडीगढ़ व मुंबई रहा है। देश के अन्य हिस्सों से 34 हजार से अधिक प्रवासी लौटे हैं। जबकि उत्तराखंड के अन्य जनपदों से गांवों की ओर रुख करने वाले प्रवासियों की संख्या भी 16 हजार से अधिक है।
उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग द्वारा सरकार को सौंपी रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि दूसरी लहर में लौटने वालो में सबसे ज्यादा देश के अन्य हिस्सों के प्रवासी शामिल हैं। दूसरे अर्थ में देखें तो उत्तराखंड से पलायन कर लोग सबसे ज्यादा देश के अन्य हिस्सों में ही गए हैं। 1 अप्रैल से 5 मई 2021 के बीच कोरोना की दूसरी लहर में रिवर्स पलायन कर गांव लौटने वालो में देश के अन्य हिस्सों से 34 हजार 360 प्रवासी हैं। जिनमें सबसे ज्यादा अकेले 10 हजार 155 प्रवासी अल्मोड़ा जिले में लौटे हैं। इसके बाद पौड़ी में 7167, टिहरी में 5411, नैनीताल में 2742 और सबसे कम हरिद्वार में 27 प्रवासी शामिल हैं। उत्तराखंड के अन्य जनपद में से 16 हजार 715 प्रवासी गांव वापस आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा अल्मोड़ा में 4565, टिहरी में 2506, पौड़ी में 1949 और सबसे कम ऊधमसिंह नगर के 12 प्रवासी हैं।

विदेश से लौटे हैं 227 प्रवासी

पौड़ी। उत्तराखंड में कोरोना की दूसरी लहर में 227 प्रवासी विदेशों से लौटे हैं। जिनमें सबसे ज्यादा टिहरी जिले में 69 प्रवासी विदेशों से वापस आए हैं। इसके बाद रुद्रप्रयाग जिले में 65, चंपावत में 73, चमोली में 26, पिथौरागढ़ में 7, नैनीताल व देहरादून में 3-3 और बागेश्वर में 1 प्रवासी विदेश से गांव लौटा है।

अंतर जनपदों से आए 1790।
पौड़ी। रिवर्स पलायन में अंतर जनपद से भी 1790 प्रवासी गांव लौटे हैं। इनमें सबसे ज्यादा पौड़ी जिले में 357, चंपावत में 350, रुद्रप्रयाग में 285 व सबसे कम देहरादून में 2 प्रवासी आए हैं।

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