जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी। गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी से टेका, खिर्सू व देवप्रयाग को जाने वाले मोटर मार्ग पंय्या, पांगर व चिनार से सजाएं जाएंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने टेका रोड पर पंय्या (देववृक्ष) की पौध रोपकर योजना का शुभारंभ किया। सीएम रावत ने कहा कि पौड़ी को पर्यटन गतिविधि का केंद्र बनाए जाने के लिए सरकार हर स्तर पर प्रयास कर रही है। इस योजना से अब पर्यटको को पौड़ी में एक नया एहसास मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को जल्द ही इस योजना के तहत पौध रोप उनके संरक्षण की जिम्मेदारी लेने के भी निर्देश दिए।
शुक्रवार को जनपद मुख्यालय पौड़ी के टेका रोड पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पंय्या (देववृक्ष) की पौध रोपी। कार्यक्रम के दौरान इस मोटर मार्ग पर उद्यान विभाग की ओर से पंय्या की 150 पौध रोपी गई। डीएचओ डा. नरेंद्र कुमार ने बताया कि पौड़ी-टेका रोड पर पांच किमी. तक 500 पंय्या की पौध लगाई जाएंगी। डीएचओ ने कहा कि पंय्या जहां गढ़वाल में पूजनीय होने के साथ ही औषधीय गुणों से भी भरपूर है। पय्यां की स्थानीय व उन्नत दोनों प्रजातियों के पौधे लाए गए हैं। इनके पूर्ण विकसित होने के बाद पर्यटको को इस मार्ग से पैदल गुजरते व सूर्यास्त का लुफ्त लेते एक अलग ही आनंद की अनुभूति होगी। डीएचओ डा. कुमार ने बताया कि पौड़ी खिर्सू मोटर मार्ग पर 16 किमी. के दायरे में पांगर के 1600 पौधे रोपे जाएंगे। यह अपने आप में जहां जल संरक्षण के लिए अलग पहचान रखता है। वहीं इसका बीज औषधी के गुणों का भंडार है। पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर घुड़दौड़ी तक करीब 13 किमी. में चिनार की पौध लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि कश्मीर का यह प्रसिद्घ पेड़ अब जनपद मुख्यालय पौड़ी की शान भी बनेगा। कश्मीर से चिनार की 500 पौध मंगाई गई है। पौधा रोपण के दौरान राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत, जिला पंचायत अध्यक्ष शांति देवी, उपाध्यक्ष रचना बुटोला, पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम, जिला महामंत्री भाजपा जगत किशोर बड़थ्वाल, दर्जाधारी राज्यमंत्री अतर सिंह असवाल, जिला प्रवक्ता भाजपा गणेश भट्ट, क्रांति किशोर नेगी आदि शामिल रहे।
गगवाड़स्यू घाटी में बांस उत्पादन की सलाह दी
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने गगवाड़स्यूं घाटी में बांस उत्पादन की सलाह दी। सीएम त्रिवेंद्र रावत ने टेका रोड पर पंय्या की पौध रोपण के दौरान अपने समीप खड़े पालिका अध्यक्ष यशपाल बेनाम से कहा कि वह गगवाड्स्यू घाटी के ग्रामीणों को बांस उत्पादन के लिए प्रेरित करें। घाटी में अधिकाशं खेत बंजर दिखाए दे रहे हैं। यदि स्थानीय निवासी चाहें तो यहां बेहतर बांस उत्पादन हो सकता है। इसके लिए उनके संपर्क में एक फर्म भी है। जो ग्रामीणों से अनुबंध भी कर सकती है।