आरंभ है प्रचंड भारतीय वायुसेना में शामिल नया एलसीएच

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जोधपुर, एजेंसी। भारत की सेना में कभी आयातित विमानों, हथियारों और फाइटर जेट्स की भरमार थी, लेकिन अब तीनों सेनाएं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। इसी कड़ी में अब स्वदेश में निर्मित हल्के लड़ाकू विमान प्रचंड को भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल किया गया है। इन लड़ाकू विमानों से मिसाइलों और अन्य हथियारों की फायरिंग की जा सकती है। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इन हेलिकप्टर्स से रक्षा उत्पादन में भारत की क्षमता का पता चलता है। इन्हें सरकारी हथियार कंपनी हिंदुस्तान एयरोनटिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है। इन्हें खासतौर पर ऊंचाई वाले इलाकों में रक्षा के लिए तैयार किया गया है।
सोमवार को जोधपुर में आयोजित कार्यक्रम में इन्हें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और एयर चीफ वीआर चौधरी की मौजूद्गी में वायुसेना में शामिल किया गया। डिदेंस मिनिस्टर ने इस दौरान इन हल्के लड़ाकू विमानों के नाम का खुलासा करते हुए बताया कि इन्हें श्प्रचंडश् कहा जाएगा। अगले कुछ सालों में भारतीय वायुसेना और सेना में इन हेलिकप्टर्स की भूमिका में इजाफा किया जाएगा। 5़8 टन के दोहरे इंजन वाले हेलिकप्टरों से हथियारों का फायरिंग टेस्ट पहले ही पूरा हो चुका है। भारतीय सेना के पास पहले से ही अमेरिकी अपाचे चपर भी मौजूद हैं। जो ज्यादा बड़े और ताकतवर हैं।
अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में ज्यादा हथियार ले जाने में इनकी अहम भूमिका है। अब प्रचंड भी इस काम में अहम रोल अदा करेगा। इस चपर का डिजाइन पूरी तरह से भारतीय है और इसमें स्वदेशी तकनीकों का ही इस्तेमाल किया गया है। इन चपर्स की टेस्टिंग लद्दाख में की गई है। ये एयर-टू-एयर मिसाइलों के जरिए चीनी ड्रोन्स को मात दे सकती हैं। इसके अलावा जमीन पर दुश्मन के टैंकों को भी ध्वस्त करने में ये सक्षम हैं। हवा से सतह पर मार करने वाले ऐंटी टैंक हथियारों के जरिए ये चपर इस काम को अंजाम दे सकते हैं।
फिलहाल इन चपर्स की 95 यूनिट्स को भारतीय सेना में शामिल किया जा रहा है। इनमें से 65 को भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाएगा। इनके निर्माण के लिए सरकार की ओर से शुरुआती बजट 3,500 करोड़ रुपये का जारी किया गया है। आने वाले समय में इसमें और इजाफा किया जाएगा। आने वाले समय में इन हेलिकप्टर्स के दूसरे अवतारों को भी तैयार किया जाएगा। प्रचंड लड़ाकू विमान की ध्रुव से काफी समानता है। इसमें कई मारक क्षमताएं हैं।

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