कोरोनाकाल में भी नहीं सुधरी स्वास्थ्य सेवा, गामीणों में आक्रोश

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-कहा, जल्द नहीं सुधरे हालात तो चुनाव में देंगे इसका जवाब
जयन्त प्रतिनिधि
कोटद्वार : द्वारीखाल क्षेत्र के अंतर्गत जसपुर में स्थापित राजकीय चिकित्सालय की दुर्दशा से आमजन आक्रोशत हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार ने हमेशा इस अस्पताल की उपेक्षा की, जिसका खामियाजा क्षेत्रीय निवासियों को भुगतना पड़ रहा है। जहां एक ओर सरकार कोरोनाकाल में प्रदेश के अस्पतालों में सुविधाओं में इजाफे के दावे कर रही है, वहीं उक्त अस्पताल की दुर्दशा सरकार के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।
क्षेत्रीय ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1990-91 में उक्त अस्पताल को स्थापित किया गया था। इस अस्पताल पर ग्राम जसपुर, ग्वील, बड़ेथ, बन्नी ,खैंडुड़ी, मित्रग्राम, सौड़, छतिंडा सहित लगभग 15 गांवों के निवासी निर्भर हैं। हालांकि, अस्पताल में प्रयाप्त सुविधाएं न मिलने के कारण आमजन को इलाज के लिए दूरस्थ क्षेत्रों की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ता है। कई बार क्षेत्रीय निवासी इस अस्पताल की हालत सुधारने की मांग कर चुके हैं, लेकिन किसी भी स्तर पर इनकी इस समस्या को नहीं सुना गया। अब कोरोना एक बार फिर से पैर पसारने लगा है तो ग्रामीणों को भी इलाज को लेकर चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि कोरोना जैसी महामारी के समय तो सरकार को इस अस्पताल की ओर ध्यान देना चाहिए। सीता देवी प्रधान ग्राम सभा, दाताराम, विनोद चन्द्र कुकरेती, प्रदीप कुमार क्षेत्र पंचायत सदस्य, सुमन कुमार, कोमल गिरि, जीएस नेगी आदि ने चेतावनी दी कि जल्द ही ग्रामीणों की उक्त मांग पर कार्रवाई नहीं की गई तो वह आने वाले चुनाव में इसका जवाब देंगे।

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