प्रवासियों की वापसी से देश के ग्रामीण इलाकों में कोविड-19 मरीजों की बाढ़

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नई दिल्ली, एजेन्सी। बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों से लाखों की तादाद में लाखों लोगों की घर वापसी से ग्रामीण भारत में कोविड-19 मरीजों की संख्या में वृद्धि की गति रफ्तार पकड़ने लगी है। सात राज्यों में जुटाए आंकड़ों से स्पष्ट हो रहा है कि मजदूर अपने साथ कोरोना वायरस भी गांव ले गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि सरकार कोरोना संक्रमण को शहरों तक सीमित रखने की रणनीति पर काम कर रही थी, लेकिन अब गांवों में इसके प्रसार ने स्वास्थ्य सुविधाओं की गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। बुधवार को देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की तादाद 2 लाख पार कर गई। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अभी कुछ हफ्ते में पीक आना बाकी है।

स्वास्थ्य सुविधाओं की गहरी चुनौती
केंद्र सरकार के कोरोना वायरस टास्क फोर्स की मदद कर रहे महामारी विशेषज्ञ और फिजिशियन डॉ. नमन शाह कहते हैं कि गांवों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के मद्देनजर वहां कोरोना पॉजिटिव केस में तेजी बहुत बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है। शाह ने कहा, ‘लोगों में पहले से ही कई गंभीर बीमारियों का होना, कुपोषण की समस्या के साथ-साथ बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में कोविड-19 मरीजों की मृत्यु दर बढ़ेगी।’

बिहार में 3 मई के बाद कोरोना पॉजिटिव केस ने पकड़ी रफ्तार
बिहार का आधिकारिक आंकड़ा बताता है कि 1 जून तक सामने आए कुल 3,872 मामलों में 2,743 का सीधा संबंध 3 मई के बाद आए प्रवासी मजदूरों से है जब सरकार ने ट्रेनों और बसों से मजदूरों को घर भेजने का अभियान शुरू किया। 25 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही परिवहन के सभी साधनों पर रोक लग गई थी। बिहार में कोरोना पॉजिटिव पाए गए ज्यादातर मजदूर दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात से लौटे थे।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नितिन मदन कुलकर्णी ने बताया कि झारखंड में ज्यादातर कोरोना पॉजिटव केस देश के पश्चिमी हिस्से से लौटने वाले मजदूरों में पाया गया। उन्होंने कहा, ‘2 मई के बाद 90% कोरोना पॉजिटिव केस प्रवासी मजदूरों में पाए गए हैं।’ राज्य में बुधवार तक कुल 752 कोविड-19 मरीज पाए गए जो 1 मई को महज 111 थे।
जिन राज्यों में पहले से ही कोविड-19 मरीजों की बाढ़ आई थी, वहां मजदूरों की वापसी से स्थिति और भयावह होती जा रही है। महाराष्ट्रम में करीब 75 हजार कोरोना पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य तंत्र लड़खड़ाने लगा है।

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