निजी प्रैक्टिस करने वालों को नियुक्ति-प्रमोशन का आरोप

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देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज में हॉल ही में नियुक्ति किये गये डाक्टरों पर नियमों के वितरीत निजी प्रैक्टिस करने के आरोप लगे हैं। कई को प्रबंधन के नजदीकी होने के चलते प्रमोशन भी देने के आरोप हैं। जिससे मरीजों को इलाज एवं छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। विगत दस सितंबर को नियुक्ति पाने वाले अधिकांश डाक्टर यहां पर पहले से तैनात है। कुछ का प्रमोशन हुआ है, कुछ उसी पद पर वापस आए हैं। कई डाक्टरों पर निजी प्रैक्टिस करने के आरोप है। कॉलेज की कई फैकल्टी में ही आक्रोश है। एक एचओडी ने विगत दिनों इंटरव्यू से पहले निजी प्रैक्टिस करने के सुबूत देकर इस बात को लिखकर भी दिया था। कहा था कि सरकार और विभाग द्वारा मांगे जाने वाले शपथ पत्र में वह झूठी जानकारी देते हैं, इसीलिए इंटरव्यू में निजी प्रैक्टिस को लेकर भी पूछताछ की जाए। एक डाक्टर की निजी लैब को अक्टूबर 2020 में सीएमओ की ओर से मानकों के विपरीत कोरोना टेस्ट किये जाने को लेकर नोटिस दिया था। सरकारी मेडिकल कॉलेज में नौकरी एवं निजी अस्पताल और लैब एक साथ करने से मरीजों एवं छात्रों को नुकसान होता है। उधर प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना का कहना है कि इंटरव्यू में तमाम पहलुओं पर सवाल पूछे जाते हैं। जहां तक निजी प्रैक्टिस का सवाल है, सभी फैकल्टी से शपथ पत्र लिया जाता है। झूठा शपथ पत्र देने पर वह स्वयं जिम्मेदार होंगे।

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