ताम्र व रिंगाल उत्पाद को बाजार नहीं मिलने से उत्पादक व हस्तशिल्पी चिंतित

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बागेश्वर। उत्तरायणी मेले में लगी नुमाईश में जहां अन्य विभागों के स्टलों में जमकर बिक्री हो रही है वहीं उद्योग केंद्र के माध्यम से लगे ताम्र व रिंगाल उत्पादकों को बाजार नहीं मिल पा रहा है। उत्पादन के अनुसार मांग न होने के कारण इस उद्योग से जुड़े उत्पादक व हस्तशिल्पी चिंतित हैं। उत्तरायणी मेले में जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से नुमाइश मैदान में कई स्टल लगाए गए हैं, जिनमें से कई स्टलों में बिक्री हो रही है, परंतु ताम्र उद्योग की बिक्री नहीं हो पा रही है। स्टल में बैठे ताम्र हस्तशिल्पी खर्कटम्टा निवासी सुंदर लाल ने बताया कि उनके पास शुद्व तांबे से बने विभिन्न वाद्य यंत्र समेत फिल्टर, जग, गिलास समेत पूजन सामग्री आदि के उत्पाद हैं। बताया कि उनके स्टल में भी कई मेलार्थी आ रहे हैं तथा इस विषय में जानकारी ले रहे हैं परंतु खरीद नहीं रहे हैं। वहीं रिंगाल हस्तशिल्पी कपकोट के रातिरकेठी निवासी हीरा सिंह मेहता ने बताया कि उनके द्वारा टोकरी, कलश, डलिया आदि रिंगाल से बने सजावटी व घर के लिए उपयोगी सामान लेकर आए हैं परंतु इनकी बिकी न के बराबर हो रही है। हस्तशिल्पियों ने बताया कि जनता की मांग अब फैशन व मशीन से बने उत्पादों की ओर हो रही है जिससे भविष्य में उनके उद्योग में संकट गहराने की आशंका है। खर्कटम्टा निवासी सुंदर राम ने बताया कि पहले उनके क्षेत्र में लगभग प्रत्येक परिवार इस कार्य को करता था, परंतु मांग कम होने के कारण अब मात्र तीन परिवार इस उद्योग से जुड़े हैं। बताया कि इस उद्योग को बढ़ावा न मिलने व मांग कम होने के कारण उन्हें भी अन्य कारोबार की तलाश करनी होगी। रिंगाल उत्पादक ने बताया कि तीन साल बाद उन्हें उम्मीद थी कि इस बार मेले में उनके उत्पाद बिकेंगे तथा उनकी आय होगी परंतु निराशा हाथ लगी है। कहा कि वे साल भर जंगलों से रिंगाल लाकर कड़ी मेहनत करते हैं परंतु मेहनताना भी नहीं मिल पा रहा है।

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