देहरादून। राजधानी देहरादून के जिला चिकित्सालय कोरोनेशन में देर रात मेडिकल कराने पहुंचे दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हो गई। अस्पताल परिसर में विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के युवकों ने एक-दूसरे पर जूते-चप्पल तक फेंके। हंगामे के दौरान अस्पताल की व्हीलचेयर क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) कक्ष के बाहर लगा शीशा भी टूट गया। विवाद शांत कराने पहुंचे अस्पताल के पीआरडी जवान के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है। घटना के बाद अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
पहले बाहर हुआ था विवाद, मेडिकल के लिए पहुंचे थे अस्पताल
जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 11:30 बजे किसी विवाद को लेकर दो युवकों के बीच अस्पताल के बाहर कहासुनी और मारपीट हुई थी। इसके बाद दोनों पक्ष मेडिकल परीक्षण कराने के लिए कोरोनेशन अस्पताल पहुंचे। बताया जा रहा है कि मेडिकल की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही दोनों पक्षों के बीच अस्पताल परिसर में किसी बात को लेकर दोबारा कहासुनी शुरू हो गई।
देखते ही देखते विवाद ने उग्र रूप ले लिया और दोनों पक्षों के युवक एक-दूसरे से भिड़ गए। अस्पताल परिसर में ही हाथापाई और धक्कामुक्की शुरू हो गई। कुछ ही देर में दोनों ओर से जूते-चप्पल फेंके जाने लगे। इससे अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
व्हीलचेयर क्षतिग्रस्त, ईएमओ
कक्ष का शीशा टूटा
मारपीट और हंगामे के दौरान अस्पताल में रखी व्हीलचेयर भी चपेट में आ गई और उसे नुकसान पहुंचा। वहीं, ईएमओ कक्ष के बाहर लगा शीशा भी टूट गया। देर रात अस्पताल में हुए इस हंगामे से वहां मौजूद मरीजों और तीमारदारों में भी दहशत का माहौल पैदा हो गया।
बीच-बचाव करने पहुंचे
पीआरडी जवान से भी मारपीट
स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल में तैनात पीआरडी जवान ने दोनों पक्षों को शांत कराने और विवाद रोकने का प्रयास किया।
आरोप है कि हंगामा कर रहे युवकों ने बीच-बचाव करने पहुंचे पीआरडी जवान के साथ भी मारपीट कर दी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से पुलिस को घटना की सूचना दी गई।
बताया जा रहा है कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही हंगामा कर रहे लोग अस्पताल से चले गए। मामले में पुलिस स्तर से जांच और संबंधित पक्षों की भूमिका सामने आने के बाद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
कोरोनेशन अस्पताल में मेडिकल परीक्षण के लिए अक्सर विवाद और मारपीट के मामलों में शामिल दोनों पक्ष पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर के भीतर ही दोनों पक्षों के बीच हिंसक विवाद होने से चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और सुरक्षा कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
चिकित्सकों और कर्मचारियों का कहना है कि यदि अस्पताल में इस तरह की घटनाओं पर समय रहते प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में किसी कर्मचारी या चिकित्सक को गंभीर चोट लग सकती है। देर रात हुई घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
अस्पताल प्रशासन ने घटना को गंभीर बताया
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. यतेंद्र सिंह ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि अस्पताल में मारपीट और हंगामा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की शिकायत पुलिस से की जाएगी और संबंधित युवकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। अस्पताल में चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।