बाढ़ लाने वाले बांधों पर छापे; सरकार की शिकायत पर इंस्पेक्शन कमेटी ने जांच के दौरान ढूंढी खामियां

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शिमला, एजेंसी। इस बार बरसात के सीजन में बाढ़ लाने वाली बिजली परियोजनाओं के बांधों पर हिमाचल सरकार की सिफारिश के बाद छापे पड़े हैं। सेंटर वॉटर कमीशन के पूर्व चेयरमैन आरके गुप्ता की अगवाई में एक टीम ने इन बांधों का निरीक्षण किया है। इसके बाद रिपोर्ट राज्य सरकार को आएगी और इस आधार पर राज्य सरकार खामियां मिलने पर कार्रवाई भी कर सकती है। इसी महीने बिजली परियोजनाओं के बांधों का निरीक्षण हुआ है। इसमें कांगड़ा जिला में स्थित पोंग डैम, मंडी जिला में स्थित पंडोह डैम और कुल्लू जिला में स्थित मलाणा-2 बिजली प्रोजेक्ट का डैम और पार्वती-3 बिजली परियोजना का डैम शामिल है। पौंग बांध से अचानक काफी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण कांगड़ा जिला के मंड क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ था। डैम के डाटा को देखकर लग रहा था कि रेगुलर आधार पर पानी नहीं छोड़ा गया और जब आपात स्थिति आई, तो एकदम पानी रिलीज कर दिया गया।
मुख्यमंत्री अपने आप इसके कारण हुए नुकसान की भरपाई का मामला भी बीबीएमबी से उठा चुके हैं। पंडोह डैम में भी लगभग यही स्थिति थी। बरसात के दिनों में जब ब्यास नदी में बाढ़ का खतरा था, तो मंडी जिला प्रशासन ने पंडोह डैम से ब्यास का पानी सतलुज की तरफ को डाइवर्ट करने का आग्रह किया था, जिसे नहीं सुना गया। इसके कारण ब्यास नदी के बेसिन में काफी नुकसान हुआ था और मंडी शहर में भी तबाही हुई थी। कुल्लू जिला में मलाणा-2 बिजली प्रोजेक्ट के डैम के गेट जाम हो गए थे और पानी ओवरफ्लो कर रहा था। इससे और भी कई तरह के खतरे हो गए थे। कुल्लू जिला में अचानक पानी छोड़े जाने के कारण सैंज बाजार में काफी तबाही हुई थी। राज्य सरकार ने इस स्थिति को भारत सरकार के साथ भी साझा किया था। इसके बाद सेंट्रल वाटर कमीशन के पूर्व चेयरमैन की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई, जिसमें ऊर्जा निदेशालय हिमाचल के विशेषज्ञ भी शामिल थे। इन्होंने डैम सेफ्टी ऑडिट के प्रावधानों के अनुसार इन बांधों का निरीक्षण किया और अब रिपोर्ट राज्य सरकार और केंद्र सरकार को भेजी जा रही है।
बरसात के दौरान ही राज्य सरकार ने भी डैम सेफ्टी एक्ट के प्रावधानों के अनुसार बिजली परियोजनाओं के बांधों का निरीक्षण किया था। इसमें केवल दो परियोजनाओं को छोडक़र बाकी में अर्ली वार्निंग सिस्टम तक नहीं लगा था। सेंटर वॉटर कमीशन की गाइडलाइन के अनुसार सिर्फ कोल डैम और नाथपा झाकड़ी प्रोजेक्ट में ही यह सिस्टम था।

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