राप्रावि कोटड़ी रहा छात्रों की विलक्षण प्रतिभा का धनी

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। जनपद पौड़ी गढ़वाल के प्रखंड रिखणीखाल के अंतर्गत ग्राम सभा एवं मूल गांव कोटड़ी ब्लाक मुख्यालय से मात्र बीस किलोमीटर दूर स्थित होने और अपनी नैसर्गिक सौंदर्य को प्रतिबिंबित करता है। जिसमें हरे भरे लहलहाते खेत, कतेड़ागाड के तटवर्ती क्षेत्र बाबा ढौंटियाल महादेव व मां नौशिणा देवी के मध्ये स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय कोटड़ी छात्रों की विलक्षण प्रतिभा का धनी रहा है। विद्यालय नित्य अपने रचनात्मक और सृजनात्मक कौशलों से नये आयामों को गढ़ने का माद्दा रखता हुआ अनवरत् प्रगति पथ पर अग्रसर हो रहा है। यद्यपि इस विद्यालय से कई रत्न अपने-अपने क्षेत्र में देश, राज्य व स्थानीय स्तर पर सेवा दे रहे हैं, लेकिन इस स्वर्णिम कड़ी में बहुत कुछ गूढ़ता भी है।।
बहुचर्चित और पुरातन अठारहवीं सदी की वह दैदीप्यमान लौ रूपी पाठशाला जो वर्तमान में उपेक्षा वश छात्राभाव से बंद है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय बड़ियार गांव की छात्र संख्या का ब्लाक स्तर में अत्यधिक होने से निकटस्थ केवल छात्राओं के लिए खोली गई आधारिक कन्या पाठशाला कोटड़ी जो वर्तमान राजकीय प्राथमिक विद्यालय कोटड़ी नाम सुविख्यात होने का साहस भर रही है। ग्रामीण अध्यापिकाओं में श्रीमती सुलोचना देवी, श्रीमती सावित्री देवी और श्रीमती कुमुद गुसाईं द्वारा विद्यालय को आधारभूत संरचना प्रदान कर जीवंतता दी गई। उस परिपाटी को नयापन व नई उड़ान भरने के सशक्त हस्ताक्षर बने प्रधानाध्यापक बिष्णुपाल सिंह नेगी। वर्ष 2007-08 नियुक्ति से लेकर अब तक निरंतर विद्यालय की उत्तरोत्तर प्रगति इस बात को प्रामाणिक करती है। लक्ष्यभेद की अनुक्रमणिका में जहां ‘त्रय पी’ का शस्त्र रूप अपनाते हुए विद्यालय की छात्र संख्या, खेलकूद, कला-चित्रकला, समूह गान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सपनों की उड़ान, स्थानीय कार्यक्रमों, वार्षिकोत्सव समारोह, सामाजिक कार्य आदि में बच्चे अपनी प्रतिभाओं से विद्यालय को मील का पत्थर या आदर्श स्वरूप प्रदान किए हुए हैं। विद्यालय जहां खेल सामग्री, प्रार्थना सभा, संगीत यंत्र, विविध कार्यक्रमों की वेशभूषा की पर्याप्तता पूरित है वहीं नामांकित हो या गैर नामांकित छात्र सभी का जन्म दिवस मनाने व कापी-पेन-पेंसिल उपहार भी पेश किया जाता है। बच्चों को अतिरिक्त खाद्य सामग्री, मिष्ठान वितरित किया जाता है। विद्यालय की साज सज्जा हो या अन्य क्रियाकलाप सभी में विद्यालय प्रबंधन समिति, ग्रामीणों, प्रबुद्ध जनों का निरंतर अभीष्ट सहयोग रहता है। नव प्रवेशी बच्चों व अन्य स्थितियों में विद्यालय परिवार समय-समय पर पूर्व से जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति व अन्य को कृत् संकल्पित रहा है व रहता है। आठ वर्षों तक की अवधि में अनवरत् रूपेण अब तक 26 छात्रों का चयन नवोदय विद्यालय में हुआ है। इस वर्ष रंजन रावत व सौरभ रावत का चयन नवोदय विद्यालय के लिए हुआ है। इसके अलावा विविध ब्लाक, जिला, प्रादेशिक प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर विजित होना भी पूर्व में स्थापित गुरुकुलम की प्रतिस्पर्धा की याद दिलाता है। इस माला की फेहरिस्त में कई मोतियों का समावेश है जो अतिरिक्त कक्षा संचालन, कंप्यूटर शिक्षा, प्रोजेक्टर, वाद्ययंत्र शिक्षण आदि विधाओं का अभ्यास सुशोभित कर मुक्त कंठ का हार सदृश विराजित होती हैं।

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