रोडवेज ने शुरू की बस सेवा, नहीं मिल रहे यात्री

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। उत्तराखण्ड परिवहन निगम के कोटद्वार डिपो ने भाबर के झण्डीचौड़ और पौड़ी के लिए गुरूवार से बस सेवा शुरू
कर दी है। हालांकि अभी बसों में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या बहुत ही कम है। शुक्रवार से डिपो की ओर से
देहरादून और हरिद्वार के लिए बसें चलाई जायेगी।
कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च से सम्पूर्ण देश में लॉकडाउन चल रहा था। इससे पूर्व 22
मार्च को जनता कफ्यू के दिन भी रोडवेज बसों का संचालन पूर्ण रूप से बंद था। 22 मार्च को ही प्रदेश सरकार ने 31
मार्च तक लॉकडाउन की घोषणा की थी। ऐसे में 25 मार्च से 24 जून तक सम्पूर्ण प्रदेश में रोडवेज की सेवा पूर्ण रूप से
ठप थी। प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों कैबिनेट बैठक में बसों के किराये को दोगुने कराने का आदेश पारित किया।
उत्तराखण्ड परिवहन निगम के कोटद्वार डिपो ने गुरूवार से बस सेवा शुरू कर दी है। कोटद्वार डिपो के एआरएम टीकाराम
आदित्य ने बताया कि गुरूवार को एक बस पौड़ी भेजी गई। बस में मात्र चार ही सवारी थी। एक बस भाबर के
झण्डीचौड़ भेजी गई है। धुमाकोट, रिखणीखाल, जमेली और लैंसडौन के लिए भी बस लगाई गई थी, लेकिन सवारी न
होने की वजह से बसों का संचालन नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार से देहरादून के लिए साढ़े सात बजे, हरिद्वार
के लिए साढ़े आठ और दस बजे बस सेवा संचालित की जायेगी। यह सभी बसें लालढांग के रास्ते जायेगी।

बॉक्स समाचार
भाबर के लोगों को मिली राहत
उत्तराखण्ड परिवहन निगम के कोटद्वार डिपो की ओर से भाबर क्षेत्र के झण्डीचौड़ के लिए बस सेवा शुरू होने से लोगों को
काफी राहत मिली है। क्योंकि ऑटो चालक भाबर से कोटद्वार का मनमाना किराया ले रहे थे। ऑटो चालक दुर्गापुर से
पचास और सिगड्डी से कोटद्वार के 80 से 100 रूपये प्रति सवारी किराया ले रहे थे। भाबर क्षेत्र के लिए परिवहन के
अन्य साधन न होने की वजह से ऑटो में जाने को मजबूर थे। यात्रियों समेत जनप्रतिधियों ने इसकी शिकायत स्थानीय
प्रशासन से की थी, लेकिन प्रशासन की ओर से इस ध्यान नहीं दिया गया। जिस कारण मजबूरी में लोग अधिक किराया
देकर बाजार आने को मजबूर थे। भाबर के लोगों ने बस सेवा शुरू होने पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि बस सेवा
शुरू होने से ऑटो चालकों की मनमानी नहीं चलेगी। अब लोग बस से भी कोटद्वार बाजार जा सकते है। पूर्व में विकल्प
न होने के कारण मजबूरी में ऑटो में ही सफर करना पड़ रहा था।

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