मानव सेवा और आध्यात्मिक साधना का अद्भुत संगम है सेवाश्रम : स्वामी अवधेशानंद गिरी

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हरिद्वार। रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम कनखल का 125वां वार्षिकोत्सव समारोह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाया गया। समारोह में जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के संतों का जीवन अनुकरणीय है। उनकी निष्ठा, अनुशासन, शिक्षा और सेवा भाव संन्यास परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।
रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम कनखल का 125 वर्षों का इतिहास मानव सेवा, चिकित्सा सेवा और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण का गौरवशाली इतिहास रहा है। मिशन के संतों में भगवान की परमार्थिक सत्ता का साक्षात स्वरूप दिखाई देता है। उन्होंने सेवाश्रम के सचिव स्वामी दयामूर्त्यानंद महाराज के कार्यों की सराहना की। समारोह की अध्यक्षता महानिर्वाणी अखाड़े के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती ने की। इस अवसर पर श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा के श्रीमहंत ज्ञान देव सिंह शास्त्री वेदांताचार्य महाराज ने कहा कि रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम स्वामी विवेकानंद के सेवा और मानव कल्याण के विचारों को धरातल पर साकार करने वाला प्रमुख संस्थान है।
महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि स्थापना काल से ही सेवाश्रम निस्वार्थ भाव से चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। रामकृष्ण मिशन मुंबई के स्वामी आत्मश्रद्धानंद महाराज ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का मानना था कि प्राणी मात्र में भगवान को देखकर उनकी सेवा करना ही सच्ची पूजा है। रामकृष्ण मठ बेलूर के सहायक महासचिव स्वामी बलभद्रानंद महाराज ने नर्सिंग हॉस्टल के विस्तार को स्वीकृति मिलने पर सेवाश्रम के सचिव स्वामी दयामूर्त्यानंद महाराज को बधाई दी। स्वामी दयामूर्त्यानंद महाराज ने कहा कि भविष्य में सेवाश्रम में चिकित्सा सुविधाओं का और विस्तार किया जाएगा। कार्यक्रम में रामकृष्ण मिशन दिल्ली के स्वामी सर्वालोकानंद, गुरुग्राम के स्वामी शांतात्मानंद तथा अन्य संतों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. स्वामी हरिहरानंद आचार्य ने किया। समारोह में श्रीमहंत ज्ञान देव सिंह शास्त्री वेदांताचार्य, महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती, महंत विष्णुदास, श्री निरंजनी पंचायती अखाड़ा के सचिव महंत रामरतन गिरी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद महाराज, स्वामी रामानंद महाराज, स्वामी ज्योतिर्मयानंद, महंत जसविंदर सिंह शास्त्री, महंत गुरमीत सिंह, संत जगजीत सिंह महाराज, स्वामी अनादयानंद सहित विभिन्न अखाड़ों और धार्मिक संस्थाओं के संत-महात्मा उपस्थित रहे।

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