शमी-हसीन जहां विवाद में उत्तराखंड के विधायक उमेश कुमार का नाम

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देहरादून/नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और उनकी पत्नी हसीन जहां के बीच वर्षों से चला आ रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामले में उत्तराखंड की खानपुर विधानसभा सीट से विधायक उमेश कुमार शर्मा का नाम सामने आया है। हसीन जहां ने उमेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि वर्ष 2018 में जब उनके और मोहम्मद शमी के बीच रिश्ते सुधारने और सुलह की कोशिश चल रही थी, तब कथित तौर पर विधायक के हस्तक्षेप के कारण दोनों के बीच समझौते की संभावना खत्म हो गई।
2018 में सुलह की
कोशिश का दावा
हसीन जहां के अनुसार, वर्ष 2018 में मोहम्मद शमी और उनके बीच बातचीत के जरिए रिश्ते सुधारने की कोशिश चल रही थी। उनका दावा है कि उस समय शमी अपनी कथित गलतियों को स्वीकार कर परिवार में वापस आने की कोशिश कर रहे थे और दोनों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही थी। हसीन का आरोप है कि इसी दौरान उमेश कुमार के कथित हस्तक्षेप के बाद पति-पत्नी के बीच दूरी और बढ़ गई और सुलह की संभावना समाप्त हो गई। उनका कहना है कि इस पूरे विवाद का सबसे अधिक असर उनकी बेटी पर पड़ा। शमी को कानूनी मदद दिलाने के नाम पर आर्थिक लाभ लेने का आरोप
हसीन जहां ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में जब मोहम्मद शमी कानूनी विवादों में घिरे थे, तब उन्होंने उमेश कुमार की मदद ली थी। हसीन का दावा है कि शमी को कानूनी परेशानियों से बचाने के नाम पर विधायक ने उनसे आर्थिक लाभ लिया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं हुई है। ऐसे में इन्हें हसीन जहां के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पुलिस और प्रशासन को प्रभावित करने का भी आरोप
हसीन जहां ने उमेश कुमार पर पुलिस और प्रशासन को प्रभावित करने के भी आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि विधायक अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पुलिस-प्रशासन पर दबाव बनाते रहे हैं। इन आरोपों को लेकर भी संबंधित पक्ष का जवाब और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
अमरोहा के फार्म हाउस मामले
से भी जोड़ा मामला
हसीन जहां ने अमरोहा के हसनपुर क्षेत्र के झूलपुरी गांव स्थित उमेश कुमार के फार्म हाउस में सामने आए कथित सामूहिक दुष्कर्म मामले पर भी सवाल उठाए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मामले में चार सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और जांच जारी है।
हसीन जहां ने मांग की है कि फार्म हाउस से जुड़े पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच हो तथा घटना में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
वहीं, विधायक उमेश कुमार ने मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उन्हें घटना की जानकारी बाद में मिली थी और उन्होंने निष्पक्ष जांच तथा दोषियों को सजा दिए जाने की बात कही है।
2012 में हुई थी शमी से
पहली मुलाकात
हसीन जहां ने मोहम्मद शमी के साथ अपने रिश्ते की शुरुआत के बारे में भी बात की है। उनके अनुसार, वर्ष 2012 में कोलकाता में एक क्रिकेट मैच के दौरान उनकी मुलाकात शमी से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे उनका रिश्ता आगे बढ़ा। हसीन के मुताबिक, शमी ने बाद में उन्हें अपने परिवार से मिलवाया।
दोनों कुछ समय तक साथ रहे और बाद में निकाह किया।
शादी के बाद दूसरी महिलाओं से संबंधों का आरोप
हसीन जहां ने मोहम्मद शमी पर शादी के बाद भी दूसरी महिलाओं के साथ कथित संबंध रखने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि बेटी के जन्म के बाद भी उनके वैवाहिक जीवन की परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ।वर्ष 2018 में हसीन जहां ने शमी के खिलाफ घरेलू हिंसा और अन्य गंभीर आरोप लगाए थे तथा तलाक की प्रक्रिया शुरू हुई थी। शमी ने उस दौर में लगाए गए आरोपों को खारिज किया था।
अभिनेत्री से शादी करने की इच्छा का भी दावा
हसीन जहां का आरोप है कि प्रसिद्ध क्रिकेटर बनने के बाद मोहम्मद शमी उनसे तलाक लेकर किसी अभिनेत्री या बड़ी हस्ती से शादी करना चाहते थे। यह भी हसीन जहां का व्यक्तिगत दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
शमी के भाई हसीब पर भी लगाए आरोप
हसीन जहां ने मोहम्मद शमी के बड़े भाई हसीब को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि हसीब चाहते थे कि शमी उनके परिवार की ही किसी महिला से शादी करें, ताकि शमी की संपत्ति और आर्थिक हित परिवार के भीतर रहें।
हसीन ने आरोप लगाया कि उन्हें रास्ते से हटाने के लिए उनके खिलाफ कथित तौर पर कई हमले करवाए गए। उन्होंने दावा किया कि वह इन कथित हमलों से बचती रहीं।
आरोपों के बीच संबंधित पक्षों का जवाब अहम
हसीन जहां द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में मोहम्मद शमी, उनके भाई हसीब और विधायक उमेश कुमार की ओर से हसीन जहां के सभी आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आरोपों को अंतिम तथ्य के रूप में नहीं बल्कि हसीन जहां के दावों/आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मामले में संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और यदि कोई जांच होती है तो उसके निष्कर्ष ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट कर सकते हैं।

 

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