सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल थे पेशावर कांड के महानायक गढ़वाली

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-91वीं वर्षगांठ पर बोले पौत्र शैलेंद्र सिंह बिष्ट गढ़वाली
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार।
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्थान सेवा समिति कोटद्वार की ओर से शुक्रवार को पेशावर कांड के नायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की 91वीं वर्षगांठ एक सादे समारोह के रूप में मनाई। समारोह में वीर चंद्र गढ़वाली के पौत्र शैलेंद्र बिष्ट गढ़वाली ने उन्हें सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बताते हुए उन्हें याद किया।
धु्रवपुर स्थित चंद्र सिंह गढ़वाली स्मारक में आयोजित सादे समारोह में पौत्र शैलेंद्र सिंह बिष्ट ने अपने संबोधन में कहा कि 23 अप्रैल 1930 को पेशावर कांड के नायक हवलदार वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने गढ़वाल राइफल के अपने सभी साथियों के साथ अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह खड़ा कर दिया था। उन्होंने पठानों के शांतिपूर्ण जुलूस पर गोली चलाने से मना कर दिया था। इसलिए उत्तराखंड में आज स्व. गढ़वाली की वीरता को याद किया जाता है। उन्होंने अंग्रेजों को संदेश दे दिया था कि वे अब अधिक दिनों तक भारत पर अपना शासन नहीं कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि पठानों पर हिंदू सैनिकों की ओर से फायर करवाकर अंग्रेजी हुकूमत भारत में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच फूट डालकर आजादी के आंदोलन को भटकाना चाहते थे, लेकिन चंद्र सिंह गढ़वाली ने अंग्रेजों की इस चाल को न सिर्फ भापा, बल्कि रणनीति को विफल कर वह इतिहास के महान नायक बन गए। इस अवसर पर शैलेश बिष्ट, गीता बिष्ट, बीना बिष्ट, मुन्नी देवी, राजेश्वरी देवी, मोहन सिंह नेगी, अमित भारद्वाज, अनुज भट्ट, मनोज गुसाईं, चंद्र प्रकाश जदली, संदीप रावत, अंकित अग्रवाल, दीपू पोखरियाल आदि मौजूद थे।

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