पांडव नृत्य ने मोहा श्रद्धलुओं का मन

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थलीसैण ब्लॉक की चौथान पट़्टी के रिक्साल गांव में आयोजित किया गया नृत्य
जयन्त प्रतिनिधि।
थलीसैण ब्लाक की चौथान पटटी के रिक्साल गांव में तीन दिनों तक चलने वाला पांडव नृत्य (डाली महोत्सव) देखने के लिए आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस महापर्व का शुभमुहूर्त मंदिर के पुजारियों व ग्रामीणों ने विधिविधान के साथ पूजा अर्चना से किया। ढोल दमाऊं की थाप पर रातभर कार्यक्रम चला।
रातभर चलने वाले इस पांडव मंडाण में भक्तों ने सूर्यवंशी देवी-देवताओं के दर्शन किए। ग्रामीण बच्ची रावत ने बताया कि अटूट आस्था एवं विश्वास से जुड़े इस पर्व में आज भी निसंतान लोग संतान प्राप्ती के लिए मन्नतें मांगने आती हैं और उनको इसका फल जरूर मिलता है। बताया कि इस पर्व को देखने चमोली, पौड़ी व अल्मोड़ा जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इस पूजन में पांडवों के साथ हीत, घण्ड्याल, लाटू, बिनसर, मां नन्दा, देवराड़ी, भैराड़ी, उपराणी सभी देवी-देवताओं का आह्वान किया गया। सुबह गंगास्नान के बाद गांव की रक्षा व भिक्षा के लिए देवगणों ने गांव भ्रमण किया। पूजा के दौरान हर घर से दूध, दही, घी, ककड़ी व मुंगरी से देवगणों का सत्कार किया गया। कार्यक्रम के समापन में भक्तों ने अवतरित देवगणों द्वारा डोली (डाली) के साथ-साथ मन्दिर मंडाण में चक्कर लगाकर व गले मिलकर विदाई ली व पूजा भण्डार में अपना व्रत तोड़ा। विदाई के समय सभी को प्रसाद भेंट किया गया।

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