कमजोर भू-कानून की पैरवी पर आंदोलन करेगा मंच

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देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने सरकार द्वारा गठित भू कानून समिति की रिपोर्ट सरकार को सौंपने की सुगबुगाहट को लेकर बयान जारी करते हुए कमजोर भू-कानून की पैरवी करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। मंच प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने कहा कि विगत कुछ दिनों से शासन व मीडिया के माध्यम से यह जानकारी मिल रही है कि पिछली सरकार द्वारा गठित भू कानून समिति अपने रिपोर्ट सरकार को सौंपने जा रही है और अपुष्ट हवालों से ये जानकारी मिल रही है कि सरकार के दबाव में समिति फिर एक लचर भू कानून की पैरवी करने जा रही है। मंच का मानना है कि जब तक हिमाचल की तर्ज पर सशक्त भू कानून लागू नहीं होता तब तक उत्तराखंड की जल जंगल और जमीन को लूटने से नहीं बचाया जा सकता है। भ्रष्ट नेता, नौकरशाह, भूमाफियाओं के साथ मिलकर इन जमीनों को हड़पने का खेल जारी रखेंगे। आंदोलनकारी मंच का मानना है कि इसी गठजोड़ ने पूर्व में राज्य की मूल निवास की व्यवस्था को साजिश के तहत खत्म करने का काम किया और अब बिना किसी रोकटोक के ये जल जंगल व जमीन को कब्जाने के खेल में लगे हैं। आज स्थिति ये है कि हरिद्वार से बद्रीनाथ व गंगोत्री तक सड़क के किनारों की ग्रामीणों की जमीन भूमाफियाओं ने बाहरी लोगों को मोटी रकम देकर बेचने का काम किया है। सिडकुल के नाम पर भी जमीनों की जमकर बंदरबांट की गई है। आंदोलकारी मंच भू कानून समिति से मांग करती है कि वह बिना किसी दबाव के राज्य में हिमाचल की तर्ज पर सशक्त भू कानून की संस्तुति सरकार से करे व पूर्व की मूल निवास की व्यवस्था को लागू करे। ताकि उत्तराखंड वासियों को उनका वाजिब हक मिल सके। अन्यथा मंच फिर से सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन को बाध्य होगा।

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