खिमलोगा दर्रे पर फंसे घायल ट्रेकर का किया रेस्क्यू , मृतक के शव को निकालने को सोमवार को चलेगा अभियान

Spread the love
Backup_of_Backup_of_add

उत्तरकाशी : समुद्र तल से 5600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खिमलोगा पास (दर्रा) में गिर कर घायल हुए बंगल के एक ट्रेकर का भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल की 2वीं वाहिनी के हिमवीरों ने रेस्क्यू किया। जिससे छितकुल पहुंचाया दिया है। जबकि खिमलोगा ग्लेशियर में गिरकर जिस ट्रेकर की मौत हुई उसके शव को निकालने के लिए सोमवार को आइटीबीपी हैली से रेस्क्यू करेगी।
वहीं गोविंद वन्यजीव राष्ट्रीय पार्क के उप निदेशक डीपी बलूनी ने पार्क की सांकरी रेंज अधिकारी को बिना अनुमति के ट्रेकिंग पर गए दल के विरुद्घ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए।
गत 29 अगस्त को बंगाल के दुर्गा नगर थाना चकदाहा, तहसील कल्याणी जिला नादिया निवासी तीन ट्रेकर और मोरी लिवाड़ी निवासी छह पोर्टर लिवाड़ी गांव से खिमलोगा-छितकुल ट्रेक के लिए रवाना हुए।
गत रविवार की शाम को खिमलोगा दर्रा पार करने के दौरान ट्रेकर सुजोय डुले और सुब्रतो विश्वास अचानक ग्लेशियर में गिरे। जिसमें ट्रेकर सुजोय डुले की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। जबकि सुब्रतो गंभीर रूप से घायल हुआ।
घायल ट्रेकर को पोर्टरों ने निकटवर्ती एक सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया तथा वहीं र्केप लगाया। गत शनिवार को पोर्टर कल्याण सिंह, प्रदीप व देवेंद्र और तीसरे ट्रेकर नरोत्तम ज्ञान के साथ छितकुल के लिए चले और शनिवार की रात को छितकुल आइटीबीपी र्केप में पहुंचे।
रविवार को घायल ट्रेकर को निकालने के लिए आइटीबीपी और जिला आपदा प्रबंधन किन्नौर की टीम घटना स्थल पर पहुंची। जिसके बाद घायल ट्रेकर सुब्रतो को रेस्क्यू कर छितकुल पहुंचाया गया। साथ ही तीन पोर्टर नैन सिंह, देवराज, जयेंद्र भी रेस्क्यू टीम के साथ छितकुल पहुंचे।
हिमाचल किन्नौर के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी आबिद हुसैन सादिक ने बताया कि मृतक ट्रेकर का शव निकालने के लिए सोमवार को आइटीबीपी हेलीकप्टर के जरिये रेस्क्यू अभियान चलाने का प्रयास करेगी। दो ट्रेकरों व छह पोर्टरों को सुरक्षित छितकुल से किन्नौर पहुंचाया गया है।
गोविंद वन्यजीव राष्ट्रीय पार्क में वर्षाकाल को देखते हुए जुलाई अगस्त और सितंबर माह में किसी भी ट्रेकिंग एजेंसी को पार्क में ट्रेकिंग करने की अनुमति नहीं दी जाती है। संबंधित ट्रेकिंग दल के कुछ व्यक्ति एक सप्ताह पहले अनुमति लेने आए थे। जिन्हें अनुमति देने से मना कर दिया गया था। लेकिन उसके बाद भी बिना अनुमति के ट्रेकिंग पर गए हैं।
डीपी बलूनी, उपनिदेशक गोविंद वन्यजीव राष्ट्रीय पार्क मोरी उत्तरकाशी

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!