नहर में पानी नहीं, सूख गई धान की क्यारियां

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उत्तरकाशी। जनपद के धनारी गांव के पांच गांव के ग्रामीणों की सिंचाई नहर विभाग की लापरवाही के कारण बदहाल पड़ी है। हिटाणु नहर क्षतिग्रस्त होने पानी नहीं चल रहा है। इससे काश्तकारों की धान की क्यारियां सूखने के कगार पर है। साथ ही नहर की दो गूलों पर ग्रामीण स्वयं श्रमदान कर उसको ठीक कर रहे हैं। ग्रामीणों ने दो दिन में नहर में पानी शुरू नहीं करने पर कलेक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी। समस्या को लेकर धनारी के गवाणा, भाट गांव, दयूली, पुजार गांव, पुरियाल गांव के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी प्रशांत आर्य से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की हिटाणु नहर गत वर्ष मानसून सीजन में क्षतिग्रस्त हो गई थी लेकिन सिंचाई विभाग की ओर से नहर की स्थिति सुधारने के लिए किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय निवासी सुरेंद्र पंवार ने कहा कि इस वर्ष धान की क्यारियों को काश्तकारों ने वैकल्पिक पानी की व्यवस्था कर बोया लेकिन अब उसकी सिंचाई के लिए पानी ही नहीं है। इससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्योंकि धनारी क्षेत्र में सबसे अधिक धान की खेती होती है। ग्रामीण इन नहर के दो गुलों पिलघाली और घराट गूल की सुधारीकरण श्रमदान के माध्यम से कर रहे हैं।
इस संबंध में कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायत की लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। इस पर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बुलाकर दो दिन के भीतर नहर में पानी शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर दो दिन में पानी नहीं चलाया गया तो उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इस मौके पर सुरेंद्र पंवार, शिव पंवार, उदय चौहान, हरीश रतूड़ी, जागेंद्र, जयंतीमणी, नरेंद्र, धर्मानंद, किशन आदि मौजूद रहे।

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